Sunday, August 12, 2018

स्मार्ट होते बच्चों की स्मार्ट परवरिश ,आइए जानते हैं कुछ सरल और प्रभावी उपाय

स्मार्ट होते बच्चों की स्मार्ट परवरिश ,आइए जानते हैं कुछ सरल और प्रभावी उपाय

“बच्चों का विकास व उनकी परवरिस -कला या विज्ञान”

माता-पिता बनना एक अनोखा और बहुत ही प्यारा अनुभव तो होता ही हैंलेकिन यह एक ऐसी कला है जिसकी कोई ट्रेनिंग नहीं मिलती है। हम सिर्फ आपने अनुभव के आधार पर ही इस जिम्मेदारी को दिल से निभाने की कोशिश करते है ,चाहे आपके कितने भी बच्चे हों, तब भी आप सीख ही रहे होते हैं, क्योंकि हर बच्चा अलग होता है उसकी परेशानियां अलग होती है | बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि जैसे ही बच्चा पैदा होता है, शिक्षक बनने का समय शुरू हो जाता है। जब की एक बच्चा आपके घर में आता है, तो यह शिक्षक बनने का नहीं, सीखने का समय होता है।

जब बच्चे गलतियां करें, तब उन्हें कैसे समझाएं?

 

आजकल के बच्चे बहुत स्मार्ट हैं. उन्हें कुछ सिखाने या बताने की ज़रूरत नहीं होती. उनकी यही स्मार्टनेस पैरेंट्स के लिए अनेक मुश्किलें खड़ी कर देती हैं, जिन्हें हैंडल करना उनके लिए आसान नहीं होता |

जब बच्चा बड़ा हो रहा होता है तो हर नई चीज उसे अपनी ओर आकर्षित करती है। उम्र से इस जिज्ञासा का कोई लेना-देना नहीं है। बच्चा चाहे छह साल का हो या सोलह साल का हो, उसकी कुछ भी नया जानने की इच्छा कभी खत्म नहीं होती। छोटे बच्चे जहां चिड़ियां और खरगोशों की बात करते हैं, वहीं बड़े बच्चे दूसरे तरह के सवाल पूछते हैं। उनकी जिज्ञासा अक्सर हमारी शारीरिक सरंचना या फिर विपरीत लिंग से बनने वाले रिश्तों को लेकर होती है।

1. सही माहौल बनाएं

सही माहौल तैयार करना बच्चों के पालन-पोषण में एक अहम् भूमिका निभाता है। आपको सकरात्मक (पॉजिटिव )माहौल तैयार करना चाहिए, जहां खुशी, प्यार, परवाह और अनुशासन की एक भावना आपके अंदर भी हो और आपके घर में भी हो।उसके लिए ऐसा प्यार भरा माहौल बनाएं जहां बुद्धि का विकास कुदरती तौर पर हो। एक बच्चा जीवन को बुनियादी रूप में देखता और उसी से सीखता है। आप उसके साथ बैठकर जीवन को बिल्कुल नयेपन के साथ देखें, जिस तरह वह देखता है तथा उससे हर विषय व हर समस्या पर बात करें |

2. अपने बच्चे की जरूरतों को जानें

कुछ माता-पिता अपने बच्चों को खूब मजबूत बनाने की इच्छा के चलते उन्हें बहुत ज्यादा कष्ट में डाल देते हैं। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे वह बनें जो वे खुद नहीं बन पाए। अपने बच्चों के जरिये अपनी महत्वाकांक्षाएं पूरी करने की कोशिश में कुछ माता-पिता अपने बच्चों के प्रति बहुत सख्त हो जाते हैं। दूसरे माता-पिता मानते हैं कि वे अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं और अपने बच्चों को इतना सिर चढ़ा लेते हैं कि उन्हें इस दुनिया में लाचार और बेकार बना देते हैं।दोनों ही तरीका बहुत गलत है समय और बच्चों की छमता व जरुरत को देख केर ही व्यवहार करना चाहिए |

3. उसे जिंदगी को जीने का तरीका सिखने दें

अगर माता-पिता अपने बच्चों की वाकई परवाह करते हैं, तो उन्हें अपने बच्चों को इस तरह पालना चाहिए कि बच्चे को माता-पिता की कभी जरूरत न हो। प्यार हमेशा आजाद करने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए,उलझाने वाली नहीं। इसलिए जब बच्चा पैदा होता है, तो बच्चे को चारों ओर देखने-परखने, प्रकृति के साथ और खुद अपने साथ समय बिताने दें और जीना सिखने दें । समय समय पैर आपने अनुभव तथा सही सलाह देते रहें ,प्यार और सहयोग का माहौल बनाएं।उस पर अपने नैतिक मूल्य, विचार, धर्म या और कुछ थोपने की कोशिश न करें। बस उसे विकसित होने दें, उसकी बुद्धि को विकसित होने दें। सिर्फ एक इंसान के रूप में उसकी अपनी शर्तों पर जीवन की ओर देखने में उसकी मदद करें, परिवार या आपकी धन-दौलत या किसी और चीज से उसकी पहचान न बनने दें।

आपका parenting style काफी हद तक आपके बच्चे के आज और आने वाले कल को प्रभावित करता है. माता पिता कैसे अपने बच्चो की परवरिश करते है, काफी हद उनके बीच के संबंधो को तय करता है.अगर आप अपने बच्चे का पालन-पोषण अच्छी तरह करना चाहते हैं,तो सबसे पहले आपको खुद खुश रहना चाहिए। अगर आपके बच्चे को घर में रोजाना तनाव, गुस्सा, डर, चिंता और ईर्ष्या देखने को मिलते हैं, तो उसका प्रभाव बच्चों पैर भी पड़ता हैं |

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