Monday, August 13, 2018

NRC पर बीजेपी नेता ओम माथुर का बड़ा बयान, कहा- 2019 जीते तो पूरे देश में होगा NRC लागू, भारत को नहीं बनने देंगे ‘धर्मशाला’

नई दिल्ली: असम को लेकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का ड्रॉफ्ट जारी होने के बाद से बयानबाजी का दौर चल रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। कभी बीजेपी, कभी कांग्रेस, तो कभी टीएमसी के नेता एनआरसी को लेकर बयान देते आ रहे हैं। सोमवार को बीजेपी नेता ओपी माथुर ने एनआरसी को लेकर बयान दिया है। इनसे पहले रविवार को कांग्रेस सांसद चरण दास महंत ने बयान दिया था.

एनआरसी पर अपने विचार रखते हुए माथुर ने कहा, ‘हम 2019 में जीतेंगे, एनआरसी अभी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत केवल असम में लागू हुआ है लेकिन इसे हम पूरे देश में लागू करेंगे। हम देश को धर्मशाला में बदलने नहीं देंगे। घुसपैठियों को कानूनी रूप से हटा दिया जाएगा। किसी भी भारतीय नागरिक को देश से नहीं जाना पड़ेगा।’

राजस्थान में मीडिया को संबोधित करते हुए माथुर ने कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष अपने परिवार के प्रति सच्चे नहीं हैं। एनआरसी को तत्कालीन प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी ने शुरू किया था लेकिन पार्टी के अंदर पिछले 10 सालों में इसे लागू करने की हिम्मत नहीं हुई। घुसपैठियों की समस्या का सामना पूरे देश में किया जा रहा है। ऐसा कोई बड़ा देश नहीं है जहां बांग्लादेशी प्रवासी नहीं रहते हैं। एनआरसी को हम पूरे देश में लागू करेंगे।’

2019 का बड़ा मुद्दा है एनआरसी

एनआरसी को अगले साल होने वाले चुनाव का बड़ा मुद्दा बनाते हुए और अपने वोट बैंक को मजबूत करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि उनकी पार्टी बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर कर देगी। हालांकि हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान की जाएगी। उत्तर प्रदेश के मेरठ में दो दिन की राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे शाह ने कहा था, ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों को किसी भी कीमत पर देश में रहने की इजाजत नहीं है। वहीं उनकी सरकार हिंदू शरणार्थियों के प्रति नरम रुख अपनाते हुए उन्हें नागरिकता प्रदान करेगी।’

गौर हो कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में 30 जुलाई, 2018 को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अंतिम ड्रॉफ्ट जारी कर दिया गया। इसमें शामिल होने के लिए असम में 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें से 40.07 लाख आवेदकों को जगह नहीं मिली है। एनआरसी से पता चलता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। जिनके नाम इसमें शामिल नहीं होते हैं, उन्हें अवैध नागरिक माना जाता है।

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