Saturday, September 15, 2018

महिलाओं को मिला धारा 498-ए के रूप में एक हथियार, जानिए कैसे करें उपयोग?

अभी तक हमारे समाज में महिलाओं और लड़कियों के लिए कई कानून बन चुके हैं। इसी में से एक कानून की धारा 498-ए है। जिसके बारे में पता होना हर महिला एवं लड़कियों के लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि ये कानून महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करता है। आइये जानते हैं धारा 498-ए के बारे में…. 

परिवार नाम के दायरे के अंदर महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुख्य कारणों में से एक दहेज भी है। इसी के चलते महिला आंदोलन के दबाव में भारतीय दंड संहिता (IPC) में ‘498-ए’ सामने आया। धारा 498-ए किसी महिला पर पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा हिंसात्मक कार्य करने पर महिलाओं को उनसे बचाने वाला एक कानून है। यह कानून क्रूरता की परिभाषा भी बताता है।

धारा 498-ए क्या है.? 

धारा 498-ए को जब IPC में शामिल किया गया। तो समाज ने, विशेषकर ऐसे परिवारों ने राहत की सांस ली जिनकी बेटियां दहेज के कारण ससुराल में पीड़ित थीं या निकाल दी गई थीं। लोगों को लगा कि विवाहित बेटियों के लिए सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है।

बहुओं के दहेज के लिए परेशान करने वालों परिवारों में भी ड़र का वातावरण बना। शुरूआत में तो कई लोग कानून की इस धारा से मिलने वाले लाभों से अपरिचित थे, लेकिन धीरे-धीरे लोग इसके लाभ उठाने लगे। पर कुछ समय बाद ही इस कानून का ऐसा दुरुपयोग शुरू हुआ कि यह लड़के पक्ष के लोगों को डराने वाला हथियार बन गया।

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