Saturday, September 15, 2018

स्मार्टफोन की बैटरी से जुड़ी ये 4 गलतफहमियां, जिनसे होते हैं हम रोज़ दो-चार

भारतीय उपभोक्ता जब फोन खरीदता है और फोन का प्रयोग करता है तो उसका सबसे पहला सवाल होता है कि फोन की बैटरी कैसा परफॉर्म करेगी। बैटरी को लेकर हर कोई इतना ज्यादा सतर्क है कि यदि कोई उसे गलत जानकारी दे दे तो वह अपना लेता है। ऐसे मे कई ऐसी गलत धारणाएं हैं जो हम फोन के चार्जिंग को लेकर करते हैं। इस विषय पर हमने गैजेट एक्सपर्ट एपी सईद से बात की तो उन्‍होंने कई उपयोगितापूर्ण जानकारी दी जो आपके साथ साझा किया जा रहा है।

1. फोन को बार-बार चार्ज करने पर बैटरी के परफॉरमेंस पर कोई असर नहीं पड़ता है। हर बैटरी की अपनी लाइफ होती है। हालांकि हर फोन में बैटरी चार्ज करने का एक निश्चित पैटर्न होता है लेकिन यदि आप उससे ज्‍यादा बाद करते हैं तो इसका कोई दुष्‍प्रभाव नहीं पड़ता।

2. नए स्मार्टफोन्स की बैटरी में सेफगार्स होते हैं जो उतना ही इनपुट स्वीकार करते हैं जितना वे संभाल सकते हैं। आप बिना विचार किए उस एडॉप्टर का उपयोग कर सकते हैं। इसमें फर्क सिर्फ चार्जिंग स्पीड पर पड़ता है। सभी डिवाइसेस में क्विक चार्जिंग टेक्नोलॉजी नहीं होती। ऐसे में दूसरे चार्जर के प्रयोग से बैटरी चार्ज होने में ज्यादा वक्‍त लग सकता है।

3. ओवरचार्ज करने से बैटरी को किसी तरह का नुकसान नहीं होता। फुल चार्ज होने के बाद फोन अपने आप ही चार्जिंग लेना बंद कर देते हैं। दरअसल, इसमें एक चिप होती है जो फोन को ओवरचार्ज होने से बचाती है।

4. फोन के पूरी तरह डिस्चार्ज होने से बचाना चाहिए। ऐसा करने से फोन की बैटरी पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इस बात पर जरूर ध्‍यान रखें जब फोन में 30 से 40 प्रतिशत बैटरी बची हो तो उसे चार्जिंग में लगा लें।

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