Sunday, September 16, 2018

मीडिया की खबरों के उलट राज्यपाल पुरोहित ने कहा- नहीं की राजीव गांधी के हत्या के दोषियों की रिहाई की सिफारिश

चेन्नई : तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने राजीव गांधी की हत्या के दोषियों की रिहाई को लेकर मीडिया में आयी खबरों का खंडन किया है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या मामले के दोषियों को रिहा करने से संबंधित खबरों के उलट राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने कहा कि राजीव के हत्यारों को रिहा करने की सिफारिश नहीं भेजी।

दरअसल, मीडिया में शनिवार को खबरे आयी जिनके मुताबिक राज्य सरकार ने मामले के सभी 7 दोषियों को रिहा करने की सिफारिश केंद्र को भेजी है। तो वहीं राज्यपाल ने साफ किया कि इस मामले कोई भी निर्णय संविधान के हिसाब से ही लिया जाएगा।

राजभवन से एक बयान जारी किया गया जिसमें कहा गया कि मीडिया में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषियों को रिहा करने का मामला गृह मंत्रालय को भेजा गया है।’ उन्होंने कहा कि कुछ टीवी चैनल इस पर बहस कर रहे हैं।’यह स्पष्ट है कि इस मामले में गृह मंत्रालय को कोई सिफारिश नहीं भेजी गई है। यह मामला जटिल है और इसमें कानूनी, प्रशासनिक और संवैधानिक मुद्दे की परीक्षा करना शामिल है।’

राजभवन ने इस बारे में विस्तार से कहा कि इस मामले में रिकार्ड का पुलिंदा राज्य सरकार से मिला है। इस प्रक्रिया में कागजातों को बारीकी से देखा जाएगा। जरूरत पड़ी तो सलाह भी लिए जाएंगे और जो भी फैसला लिया जाएगा वो संविधान के अनुसार ही होगा।

राजीव गांधी हत्या मामले के 7 दोषी 1991 से जेल में बंद हैं। आपको बता दें कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके के अध्यक्ष एम के स्टालिन ने भी कहा था कि राजीव गांधी हत्या में दोषी सजा काट रहे हैं। इनकी रिहाई के लिए राज्यपाल से सिफारिश करनी होगी। एजी पेरारिवलन सहित सभी दोषियों को तत्काल रिहा करने के लिए राज्य सरकार को राज्यपाल के पास जाना चाहिए।

आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या 21 मई, 1991 को हुई। तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनाव सभा के दौरान राजीव गांधी एक आत्मघाती महिला के विस्फोट का शिकार हो गये और उनकी मौत हो गयी। बाद में आत्मघाती महिला की पहचान धनु के तौर पर हुई। इस विस्फोट में धनु के साथ 14 अन्य लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी थी। देश के एक प्रमुख नेता की आत्मघाती विस्फोट के द्वारा हत्या करने का ये उस वक्त तक का सबसे पहला मामला था।

पूर्व मुख्यमंत्री की हत्या के दोषी वी श्रीहरण उर्फ मुरूगन, टी सतेन्द्रराजा उर्फ संथम, ए जी पेरारिवलन उर्फ अरिवु, जयकुमार, राबर्ट पायस, पी रविचन्द्रन और नलिनी 25 साल की सजा काट रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट नें 18 फरवरी, 2014 को तीन मुजरिमों-मुरूगन, संथम और पेरारिवलन को मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। ऐसा इस वजह से क्योंकि उनकी दया याचिका पर सुनाई बहुत देर से शुरू हुई।

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