Saturday, September 15, 2018

बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए जल्द लागू होगा मसाला बॉन्ड : अरुण जेटली

नई इंफ्रास्ट्रक्टर लोन की शर्तों पर विचार करने की बात करते हुए शुक्रवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक बड़ा ऐलान किया है। वित्त मंत्री ने मसाला बॉन्ड का जिक्र करते हुए बताया कि इसे लेकर अहम फैसले लिए गये। साथ ही महंगाई और देश में लगातार बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दामों को लेकर भी बात की। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि 2018-19 में मसाला बॉन्ड को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिये गये। जिससे की ईंधन के बढते दामों में जल्द से जल्द लगाम लगे। इसे लेकर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

मसाला बॉन्ड के बारे में बता दें कि ये भारतीय रुपए में विदेशों में जारी किया जाने वाला एक बॉन्ड  हैं जिसे भारतीय कंपनियों के द्वारा जारी किया जाता है जिससे कि विदेशी निवेश किये जा सके। इसे भारतीय रूप में रखने के लिए ट्रेडिश्नल तरीके से पेश करने उद्देश्य से इसका नाम भारतीय मसालों पर रखा गया है। विदेशी पूंजी बाजार में निवेश के लिए भारतीय रुपए में जारी किया जाने वाला ये एक बॉन्ड है। इससे पहले भारतीय कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट में निवेश करती थी तब जारी किया जाने वाला बॉन्ड डॉलर में हुआ करता था। जिसका मूल्य घटता-बढ़ता रहता था। जिससे भारत के निवेशक कंपनियों को घाटे का सामना करना पड़ता था

जेटली ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश कॉर्पोरेट बॉन्ड पोर्टफोलियो के 20% की एक्सपोजर सीमा को हटाने के बारे में सोचा जा रहा है और इसके लिए एक कॉर्पोरेट समूह की समीक्षा की जा रही है। साथ ही आधारभूत संरचना कर्ज लिए जरूरी हेजिंग जैसी स्थितियों पर भी गौर किया जाएगा। जिससे कि निर्माण क्षेत्र की इकाइयों को 50 मिलियन तक बाहरी वाणिज्यिक उधार लेने के लिए 1 साल या कम से कम परिपक्वता के साथ इस बारे में अनुमति दी जा सके।

जेटली ने कहा कि दुनियाभर के अन्य देशों की अपेक्षा भारत की विकास दर काफी ज्यादा है। हमारे देश में मुद्रास्फीति मध्यम सीमा में है। और कहा कि कोई चिंता न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि बढ़ते कच्चे तेल की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय वजहों से देश में तेल महंगा हुआ है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बैठक का आयोजन कियाष इस बैठक में आरबीआई के गवर्नर और उप गवर्नर, वित्त मंत्रालय और पीएमओ के अधिकारी मौजूद थे। जिसमें आरबीआई ने विश्व की अर्थव्यवस्था और बाहरी कारकों की स्थिति के बारे में कई जानकारियां पेश कीं। उन्होंने कहा कि चालू खाता घाटा का विस्तार करने के मुद्दे के समाधान के लिए गैर-आवश्यक आयात में कमी और निर्यात में बढ़ोत्तरी को लेकर कदम उठाये जा रहे हैं।

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