Friday, September 14, 2018

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: दहेज प्रताड़ना मामले में गिरफ्तारी पर पुलिस लेगी निर्णय

दहेज प्रताड़ना के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया है। IPC 498 A पर सुनवाई के बाद हुए फैसले के तहत अब अगर कोई महिला अपने पति और उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराती है तो उनकी तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर राज्य के डीजीपी इस मुद्दे पर पुलिस अफसरों व कर्मियों में जागरुकता फैलाएं। यही नहीं, उन्हें बताया जाए कि सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर जो सिद्धा न्त दिया है वे आखिर क्या है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पति और उसके रिश्तेदारों के सरंक्षण करने के लिए जमानत के रूप में अदालत के पास अधिकार मौजूद होंगे। इस तरह आपराधिक मामले की जांच के लिए परिवार कल्याण समिति की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस संशोधन पर कहा कि इस तरह कानून की खामियों को कोर्ट नहीं भर सकता। यह कार्यपालिका द्वारा कानून लाकर ही करना संभव है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बराबरी बनाना जरूरी है। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाता है तो कानून के अंतरगत हाईकोर्ट जा सकते हैं। यदि पति पक्ष अग्रिम जमानत कोर्ट में अर्जी दाखिल करता है तो उसी दिन कोर्ट में सुनवाई हो सकती है।

जानकारी दे दें कि 28 जुलाई 2017 को राजेश शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश मामले में दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले में कई दिशानिर्देश जारी किए थे। जिसमें दहेज उत्पीड़न मामले में बिना किसी पड़ताल के पति और ससुराल वालों की गिरफ्तारी पर रोक की बात कही गई थी। पीठ ने हर जिले में कम से एक परिवार कल्याण समिति के गठन करने का भी निर्देश दिया था। बता दें कि शीर्ष अदालत ने कहा था कि 498ए की हर शिकायत इस समिति के पास भेजा जाए । समिति की रिपोर्ट आने तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। इस काम के लिए सिविल सोसाइटी को भी शामिल करने का निर्देश जारी किया गया था।

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