Sunday, September 16, 2018

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की राजनीति में एंट्री, नीतीश कुमार की JDU में थामा दामन

नई दिल्‍ली: राजनीतिक दलों को सफलता के शिखर तक पहुंचाने वाली चुनावी रणनीतियां बनाने वाले सफल रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब खुद राजनीतिक के दंगल में उतर गए है ।  वे जेडीयू में शामिल हो गए हैं। पटना में बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में जेडीयू की राज्‍य कायकारिणी की बैठक में उन्‍होंने पार्टी का दामन थामा। बताया जा रहा है कि जेडीयू में वह दूसरे नंबर पर होंगे। इस दौरान किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे निभाएंगे। वह पार्टी और सरकार के बीच पुल का काम करेंगे।Prashant kishor joins JDUप्रशांत किशोर बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव और 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र के लिए सफल चुनावी रणनीतियां बना चुके हैं। बीते 10 सितंबर को उन्‍होंने राजनीतिक दलों के लिए चुनावी प्रचार रणनीति बनाने से संन्‍यास लेने की घोषणा की थी, जिसके बाद से ही उनके राजनीति में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं।

‘लोगों के बीच जाकर काम करना चाहता हूं’

बता दें कि पिछले दिनों हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनस में एक संवाद के दौरान पीके ने यह संकेत दे दिया था कि अब वह चुनावों में किसी पार्टी के साथ जुड़कर काम नहीं करेंगे। इस संवाद के दौरान पीके ने कहा था कि वह जनता के बीच जाकर उनके बीच काम करना चाहते हैं जो कि उनका पसंसदीदा काम है। इस बारे में पूछे जाने पर कि वह कहां काम करना पसंद करेंगे, किशोर ने बिहार और गुजरात का नाम लिया था।

किसी भी दल से जुड़ाव को किया था खारिज

इसके बाद से ही यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि प्रशांत जेडीयू के साथ राजनीतिक करियर शुरू कर सकते हैं। हालांकि संवाद के दौरान इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने किसी भी दल के साथ जुड़ाव की बात को खारिज कर दिया था।

जेडीयू नेता ने दी प्रतिक्रिया 
उधर, प्रशांत किशोर के राजनीतिक करियर पर जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। त्यागी ने कहा, ‘उन्होंने (प्रशांत) अपनी इच्छा जाहिर की है और हम पार्टी में उनका स्वागत करेंगे। फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार करते हैं।’

बता दें कि प्रशांत किशोर 2014 में भारतीय जनता पार्टी, 2015 में राजद-जेडीयू-कांग्रेस महागठबंधन और 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के लिये काम कर चुके हैं. एक समय चुनाव में जीत की गारंटी बन चुके प्रशांत किशोर उस समय चर्चा में आए थे जब 2014 के चुनाव प्रचार में बीजेपी के प्रचार को उन्होंने ‘मोदी लहर’ में बदल दिया था.  उसके बाद उनके बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मतभेद की खबरें आईं और उन्होंने साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (आरजेडी+जेडीयू+कांग्रेस) के प्रचार की कमान संभाल ली और इस चुनाव में बीजेपी को तगड़ी हार का सामना करना पड़ा.

हालांकि, 2015 के विधानसभा चुनाव के बाद भी ऐसी खबरें आईं कि नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर के बीच कुछ मतभेद चल रहा है. हालांकि, प्रशांत किशोर के जेडीयू में शामिल होने के ऐलान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नीतीश कुमार के साथ उनके पुराने मतभेद अभ खत्म हो गये हैं.

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