Friday, October 12, 2018

भारत ने विश्व बैंक की मानव पूंजी सूचकांक रिपोर्ट को किया खारिज, मिला 115वां स्थान

नई दिल्ली। विश्व बैंक की ओर से मानव पूंजी सूचकांक की रिपोर्ट को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि बच्चों के जीवित रहने की संभावना, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे पैमाने में भारत कुल 157 देशों की सूची में 115वें स्थान पर है। रिपोर्ट में भारत को नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देशों से भी नीचे रखा गया है। विश्वबैंक की इस रिपोर्ट को गुरुवार को भारत ने खारिज कर दिया है। भारत की ओर से कहा गया है कि इस रिपोर्ट में मानव पूंजी के लिए विकास के लिए सरकार ने जो कदम उठाए हैं उन्हें शामिल नहीं किया गया है।

अहम प्रयासों को नहीं किया गया शामिल

वित्त मंत्रालय की ओर से विश्वबैंक की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा गया है कि भारत सरकार ने मानव सूची सूचकांक की रिपोर्ट को खारिज करने का फैसला लिया है क्योंकि इसमे मानव पूंजी को बढ़ाने के लिए भारत सरकार के अहम प्रयासों को नजरअंदाज किया गया है। आपको बता दें मानव सूचि सूचकांक को 157 देशों के आंकड़ों के आधार पर जारी किया गया है, जिसमे इस बात को अहम लक्ष्य रखा गया था कि जो बच्चा जन्म लेता है वह 18 वर्ष की आयु तक कम से कम प्राप्त करे।

पहला स्थान मिला इस देश को

मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस रिपोर्ट में तमाम योजनाएं जिसमे समग्र शिक्षा अभियान, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना को शामिल नहीं किया गया है, लिहाजा सरकार विश्वबैंक की इस रिपोर्ट को खारिज करती है और वह मानव पूंजी सूचकांक को लेकर अपना सतत प्रयास आगे भी जारी रखेगी, जिससे कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाया जा सके। आपको बता दें कि विश्वबैंक की इस सूची में पहला स्थान सिंगापुर को मिला हैा।

अमिताभ कांत ने दिया था बड़ा बयान

विश्वबैंक की इस सूची में सिंगापुर के बाद दक्षिण कोरिया, जापान, हॉगकॉग और फिनलैंड का स्थान है। आपको बता दें कि नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने जुलाई माह में कहा था कि भारत में मानव विकास इंडेक्स में सुधार किए बगैर 10 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि की दर को हासिल नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि देश समें विकास तभी रफ्तार पकड़ सकता है जब देश में जच्चा-बच्चा मृत्यु दर उंची हो। उन्होंने कहा था कि अगर 10 फीसदी की रफ्तार से विकास करना है तो एचडीआई में सुधार लाना जरूरी है।

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