Friday, October 12, 2018

चुनाव की घोषणा होते ही ब्यूरोक्रेट्स तलाश रहे नए ‘ठिकाने’, कार्मिक विभाग को भेजे आवेदन

-एक दर्जन से अधिक आईएएस और आईपीएस ने मांगा सेंट्रल डेपुटेशन

जयपुर। चुनाव आयोग की और से पांच राज्यों के चुनाव की तारीखें घोषित करने के साथ ही राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप सा मचा हुआ है। इस हड़कंप की वजह से साफ जाहिर है कि इस बार सत्ता में परिवर्तन संभावना के चलते ब्यूरोक्रेट्स ‘सेफ’ जगहों की तलाश में जुट गए हैं। पांच साल तक सत्ता के करीब रहे कई ब्यूरोक्रेट्स को अब आने वाले समय में ‘ठंडे’ स्थान पर लगाए जाने का डर सताने लगा है और यही वजह है कि ऐसे ब्यूरोक्रेट्स ने अपने नए ठिकाने की तलाश शुरू कर दी है।

हरी झंडी का है इंतजार
राज्य में विधानसभा चुनाव होने और नतीजे आने में अभी पूरा दो माह का समय बाकी है, लेकिन इस बीच प्रदेश के ब्यूरोक्रेट्स ने अपने नए ठिकाने तलाशने में जुट गए हैं। करीब एक दर्जन से अधिक आईएएस और आईपीएस ने राज्य के कार्मिक विभाग के समक्ष सेंट्रल डेपुटेशन पर जाने के लिए आवेदन कर दिया है। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही इन अधिकारियों को सेंट्रल डेपुटेशन पर भेज दिया जाएगा। पीएचईडी विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री रजत मिश्र, जयपुर के संभागीय आयुक्त टी रविकांत, एडीजी रेलवे जंगा श्रीनिवास राव, आईएफएस अनुराग भारद्वाज, अरिंदम तोमर और आईएएस शिखर अग्रवाल ने सेंट्रल डेपुटेशन पर जाने के लिए आवेदन किया है।

गोटी फिट करने की जुगत
वहीं एक दर्जन से अधिक आईएएसए आईपीएस और आईएफएस सेंट्रल डेपुटेशन पर जाने के लिए पाइप लाइन में हैं। सूत्रों के अनुसार सब कुछ ठीक रहा तो इन अधिकारियों के जल्द ही रिलीव करने के आदेश जारी कर दिए जाएंगे। भाजपा सरकार में सत्ता के नजदीक माने जाने वाले आईएएस अधिकारियों की अब विदाई तय मानी जा रही है। चर्चा यह भी है कि कांग्रेसी नेताओं ने ऐसे अधिकारियों की सूची भी आलाकमान को भेज दी है जो भाजपा सरकार में काफी नजदीक थे। वहीं जोड़-तोड़ में माहिर आईएएस अधिकारी अभी से गोटी फिट करने की जुगत में जुट गए हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ब्यूरोक्रेसी पर सवालिया निशान लगाए थे।

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