Wednesday, October 10, 2018

दुर्गा पूजा अनुदान को लेकर ममता के हक में फैसला, हाई कोर्ट ने हटाया स्टे

कोलकाता : कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राहत दी है। बता दें कि उन्‍होंने राज्य में दुर्गा पूजा समितियों को 10-10  हजार अनुदान देने की घोषणा की थी। ममता सरकार ने कुल 28 करोड़ रुपये के अनुदान का ऐलान किया है। हाई कोर्ट ने मंगलवार तक इस भुगतान योजना को रोककर रखने के लिए कहा था। जबकि आज की सुनवाई में कोर्ट ने 28 हजार दुर्गा पूजा समितियों को 10-10 हजार रुपये देने के राज्य सरकार के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। इस तरह धनराशि वितरण पर लगी अंतरिम रोक भी खत्म हो गई है।

याचिका दायर करने वाले वकील ने राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए दावा किया था कि यह सिर्फ दुर्गा पूजा समितियों को दान है और इसका कोई सार्वजनिक उपयोग नहीं है। जिस पर महाधिवक्ता किशोर दत्ता में खंडपीठ के समक्ष दलील दी थी कि यातायात सुरक्षा अभियान के तहत पुलिस की सहायता करने के लिए इस धन का उपयोग किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दुर्गा पूजा में प्रत्येक पंडाल को 10 हजार रुपए दिए जाने वाले अनुदान पर कोलकाता हाइकोर्ट ने स्थगनादेश  को पहले 11 अक्टूबर तक बढ़ाने का निर्देश दिया था। यह निर्देश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश देवाशीष कर गुप्त व न्यायाधीश शंपा सरकार की खंडपीठ ने दी थी। हालांकि हाईकोर्ट में बुधवार को भी इस मामले पर सुनवाई हुई। बता दें कि 10 सितंबर को ममता बनर्जी ने पूजा समितियों और पुलिस के साथ समन्वय बैठक को संबोधित करते हुए राज्य भर में 28 करोड़ रुपये का पैकेज देने की घोषणा की थी।

मामले को लेकर राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल किशोर दत्त व शक्तिनाथ मुखर्जी ने कहा था कि राज्य की ओर से यह धन दुर्गा पूजा में अनुदान के तौर पर नहीं दिए जा रहे हैं। यह सरकारी परियोजना का धन है जो सरकारी काम में उपयोग किया जा रहा है। सरकार किस परियोजना में कितना खर्च करेगी इसे लेकर करदाता प्रश्न नहीं उठा सकते। अदालत भी इनके खर्च को लेकर हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्‍होंने कहा कि अगले वर्ष के बजट में इसे दिखाया जाएगा।

राज्य सरकार के इस दावे पर खंडपीठ ने सवाल उठाते हुए कहा कि कम्यूनिटी पुलिसिंग के लिए बजट एक करोड़ रुपये था जिसे बढ़ाकर 28 करोड़ कैसे किया गया। पैसे सही तरीके से खर्च न होने पर उसकी जिम्मेदारी किसकी है? अदालत यदि सरकारी परियोजना में हस्तक्षेप न भी करे तो कोई भी राज्य किसी गाइडलाइन या निगरानी के बगैर निजी संस्थान को क्या पैसे दे सकती है?

दरअसल राज्य के वित्तीय कोष में कमी के बाद भी वर्तमान सरकार ने 2011 में सत्ता में आने के बाद से विभिन्न क्लबों को करीब 600 करोड़ रुपये वितरित कर चुकी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य के कर्ज को लेकर पूर्ववर्ती वाममोर्चा सरकार को जिम्मेवार ठहराती आई है। यह भी आरोप लगाती रही हैं कि केंद्र सरकार राज्य को मिलने वाले विभिन्न परियोजनाओं की राशि में कमी कर रही है और पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव करती है।

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