Saturday, October 13, 2018

एम्‍स प्रशासन ने खोले राज, कहा-स्वामी सानंद उपवास तोड़ना चाहते थे, लेकिन कोई था जो उन्हें रोक रहा था

ऋषिकेश : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा है कि दरअसल स्वामी सानंद उपवास तोड़ना चाहते थे, लेकिन कुछ लोग थे जो उन्‍हें ऐसा करने से रोक रहे थे। वह परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति था। उन्होंने कहा है कि स्वामी सानंद तीन बार एम्स में भर्ती किए गए और उनके साथ इस विषय पर कई बार बातचीत हुई। अगर पता होता तो हम उसकी भी रिकॉर्डिंग करते।

अंतिम दर्शन के लिए नहीं दी अनुमति
स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने की मांग को अनुमति नहीं दी गई है। प्रो रविकांत ने बताया कि स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को किसी भी दशा में अंतिम दर्शन के लिए नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज कोई प्रदर्शनी की जगह नहीं है। उन्‍होंने बताया कि स्वामी सानंद अपनी देह एम्स को दान कर चुके हैं और इस पर परिजन भी सहमति जता चुके हैं। इसलिए दान की हुई वस्तु को वापस लेने का कोई मतलब नहीं बनता।

कई बीमारियों से जूझ रहे थे स्‍वामी सानंद
प्रो. रविकांत ने स्‍वामी के सेहत की जानकारी देते हुए बताया कि उनके शरीर में ग्लूकोज और पोटेशियम की कमी के कारण गुरुवार दोपहर हृदयघात हुआ था जो उनके मौत की वजह बनी। उन्हें पहले से ही उच्च रक्तचाप की शिकायत रहती थी, जो खतरनाक स्‍तर पर पहुंच जाता था। इसके लिए वह दवा भी खा रहे थे। उनके आर्टिक वाल्व में दो ब्लाकेज भी थी जिसका उन्‍होंने कभी उपचार नहीं कराया। उन्हें हॉर्निया की भी शिकायत थी और प्रोस्टेट बढ़ा हुआ था। उन्हें कॉर्डियोग्राफी की सलाह भी दी गयी थी। इस बीच उनके शरीर में अचानक ग्लूकोज और पोटेशियम की कमी आ गयी। जिससे उनके हृदय ने काम करना बंद कर दिया। बता दें कि गुरुवार सुबह उप जिलाधिकारी के साथ बातचीत के बाद स्वामी सानंद को एम्स दिल्ली रेफर करने की बात चल रही थी और शाम तक उन्हें दिल्ली भेजा जाना था। लेकिन पहले ही उनकी मृत्यु हो गयी।

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