Sunday, October 14, 2018

शुभ कार्य में बांधे जाने वाले कलावा के पीछे छुपे कारण को जानकर हो जायेंगे आप हैरान

अक्सर देखा जाता है कि कलावा या मोली को हिंदू धर्म के हर शुभ कार्यों में हाथों पर बांधा जाता है। ऐसा कहते है कि ये कलावा आपकी रक्षा करता है। लेकिन क्या आप इसके बांधने के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को जानते हैं। जब आप कोई शुभ कार्य को संपन्न करते हैं तो प्रारंभ में आपके माथे पर तिलक किया जाता है और उसके बाद में आपके हाथ में मौली यानि कलावे को बांधा जाता है, पर इसको आखिर क्यों बांधा जाता है और इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण हैं इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं। तो चलिए आज हम आपको बताते है इसके पीछे का कारण –

* बात पहले हम पौराणिक मान्यताओं की करते है – जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि इसकी शुरूआत उस समय से हुई जब दानवराज राजा बलि ने भगवान विष्णु के अवतार वामन को सबकुछ दान कर दिया था और भगवान वामन ने कलावे को रक्षासूत्र के रूप में इसको राजा बलि के हाथों पर बांधा था। इतना ही नहीं साथ ही इसके अलावा पौराणिक मान्यताओं में यह भी बताया जाता है कि भगवान इंद्र जब वृत्तासुर से लड़ने के लिए गए थे तब उनकी पत्नी शची ने इंद्र की भुजा पर यह रक्षासूत्र के रूप में बांधा था। इस युद्ध में भगवान इंद्र की विजय हुई थी।

* शास्त्रों – बात अगर शास्त्रों की करे तो ऐसा भी बताया गया है कि मौली को कलाई पर बांधने से त्रिदेवों की कृपा मिलती है और व्यक्ति देवत्व के मार्ग पर अग्रसर होता है। मौली यानि कलावे को अविवाहित कन्याओं तथा पुरुषों के दायें हाथ पर तथा विवाहित स्त्रियों के बाएं हाथ पर बांधा जाता है। बता दे  मंगलवार या शनिवार को आप पुरानी मौली को उतार कर नई मौली को अपने हाथ पर बांध सकते हैं। वही मौली बांधते समय धर्म में आस्था रखनी चाहिए। इस प्रकार से बांधी हुई मौली आपकी हर संकट से रक्षा करती है।

* ज्योतिषशास्त्र –  ज्योतिषशास्त्र की माने तो , लाल रंग का संबंध मुख्यतः सूर्य और मंगल ग्रह से है, साथ ही पीला रंग देवताओं के गुरु देवगुरु बृहस्पति का प्रतीक है। बृहस्पति ज्ञान का कारक ग्रह है। मौली बांधने से जहां एक ओर ज्ञान की वृद्धि होती है, वहीं दूसरी ओर साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होती है।कहते हैं कि जिस भी देवी-देवता की पूजा करके यह कलावा अथवा रक्षा सूत्र बांधा जाता है, उस देवी-देवता की अदृश्य शक्ति धागों में समाहित होकर मनुष्य की मनोकमानाएं पूर्ण करने के साथ ही रक्षा करती है। सनातन धर्म में सदियों से माना जाता है कि कलाई पर कलावा बांधने से जीवन पर आने वाले संकट से रक्षा होती है और शुभ ग्रह अनुकूल हो जाते हैं।

* विशेषज्ञों –  इतना ही नहीं बल्कि के अनुसार, शरीर के कई प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें कलाई से होकर गुजरती हैं। कलाई पर मौली या कलावा बांधने से इन नसों की क्रिया नियंत्रित रहती है। एक्यूप्रेशर की भांति कलाई पर इन धागों का दबाव बनने के कारण त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ का सामंजस्य बना रहता है और कई प्रकार की बीमारियां दूर होने लगती हैं। कलावा बंधवाते समय आपकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए और आपका दूसरा हाथ सिर पर रखा होना चाहिए। अगर आप पर्व के अलावा किसी अन्य दिन मौली बंधवाना चाहते हैं, तो मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना जाता है।

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