Monday, December 3, 2018

विश्व बैंक ने जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए फंड को किया दोगुना, अब खर्चे जाएंगे 200 अरब डॉलर

विश्व बैंक ने साल 2021-25 के लिए जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए फंडिंग को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, इन सालों में जलवायु पर किए जाने वाले फंड को विश्व बैंक ने दोगुना कर दिया है। जिसके बाद ये फंड 200 अरब डॉलर हो गया और इस फैसले का की घोषणा संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के समिट में किया गया।

विश्व बैंके के इस फैसले के बाद इन 5 साल में जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए 200 अरब डॉलर खर्चे जाएंगे। विश्व बैंक के द्वारा जारी एक बायान में कहा गया कि “करीब 100 अरब डॉलर तो सीधे बैंक से फंड किए जाएंगे। इसके अलावा बाकी बचे फंड को दो विश्व बैंक की एजेंसी से जुटाया जाएगा।” जानकारी दे दें कि पोलैंड में करीब 200 देश सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

2015 में ऐतिहासिक पेरिस समझौता क्या है?

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में ये देश इस समस्या पर चर्चा करेंगे। जलवायु परिवर्तन की समस्या से दुनिया के सभी देश चिंतित हैं और सबसे ज्यादा छोटे और गरीब देश। इसके अलावा ये देश विकसित और अमीर देशों पर इस बात का दबाव डाल रहे हैं कि साल 2015 में पेरिस समझौते के दौरान हुए वादों को पूरा किया जाए। आपको बता दें कि साल 2015 में ऐतिहासिक पेरिस समझौता हुआ। इस समझौते के मुताबिक तापमान में बढ़त को दो डिग्री तक कम करने का लक्ष्य तय किया गया लेकिन अब तक इस लक्ष्य को पाया नहीं जा सका।

जलवायु परिवर्तन के हो रहे घातक परिणाम

चाहे विश्व का कोई छोटा बड़ा देश हो जलवायु परिवर्तन के बेहद ही घातक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसके शिकार कई देश बनते जा रहे हैं। विश्व के समुद्रों का जल स्तर बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा जंगलों में भी भीषण आग, लू और तूफान जैसी आपोस्टाएं आती ही जा रही हैं। इन सबसे जान-माल दोनों की हानि हो रही है।  जिसका प्रतिकूल प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था और विकास पर पड़ रहा है।

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