Tuesday, December 4, 2018

अगर आप करते हैं मंत्र जाप तो इन बातों का रखें ख्याल, वरना नहीं मिलेगा लाभ

‘जप’ के द्वारा ”ईश्वर” को स्मृति-पटल पर अंकित किया जाता है। ‘जाप’ के आधार पर ही किसी सत्ता का ‘बोध’ और ‘स्मरण’ हमें होता है। शरीर को साफ रखने के लिए नित्य नहाना जरूरी है, उसी प्रकार कपड़े नित्य धोने आवश्यक हैं, घर की सफाई नित्य की जाती है। सतयुग में तो मूर्ति पूजा से ही लाभ प्राप्त हो जाता था किन्तु कलयुग में मात्र मूर्ति पूजा से सुख नहीं पाया जा सकता है। भविष्यपुराण में भी इस बात का जिक्र आता है कि कलयुग में बिना मंत्र ध्यान और जप से इंसान सुख प्राप्त नहीं कर सकता है। जो भी व्यक्ति माला की मदद से मंत्र जप करता है, उसकी मनोकामनएं बहुत जल्द पूर्ण होती हैं। माला के साथ किए गए जप अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं। मंत्र जप निर्धारित संख्या के आधार पर किए जाए तो श्रेष्ठ रहता है। इसीलिए माला का उपयोग किया जाता है।

गायत्री-मंत्र या अन्य कोई भी सात्विक साधना के लिए तुलसी या चंदन की माला लेनी चाहिए। कमलगट्टे, व धतूरे आदि की माला तांत्रिक प्रयोग में प्रयुक्त होती हैं। जमीन पर बिना कुछ बिछाये साधना नहीं करनी चाहिए, इससे साधना काल में उत्पन्न होने वाली ‘विधुत’ जमीन में उतर जाती है। आसन पर बैठकर ही जप करना चाहिए। ‘कुश’ का बना आसन श्रेष्ठ है, सूती आसनों का भी प्रयोग कर सकते हैं।

जप जितना किया जा सकें उतना अच्छा है, परन्तु कम से कम एक माला (108 मन्त्र) नित्य जपने ही चाहिए। जितना अधिक जप कर सकें उतना अच्छा है। प्रातःकाल पूर्व की ओर तथा सायंकाल पश्चिम की ओर मुख करके जप करना चाहिए। “गायत्री मंत्र” उगते “सूर्य” के सम्मुख जपना सर्वश्रेष्ठ है। एकांत में जप करते समय माला को खुले रूप में रख सकते हैं, पर जहां बहुत से व्यक्तियों की दृष्टि पड़े, वहां ‘गोमुख’ में माला को डाल लेना चाहिए या कपड़े से ढक लेना चाहिए। अन्त में, जप-साधना का एक मात्र उद्देश्य भगवान व भक्त के बीच एकात्म भाव की स्थापना करना है |

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