Monday, December 3, 2018

जयंती विशेष: प्रेरणा से भरा है देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का पूरा जीवन

आज डॉ.राजेंद्र प्रसाद की जयंती है। इस मौके पर पूरा देश उन्हें याद करता है। डॉ.राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने भारतीय संविधान के मिर्माण में भी अपना योगदान दिया था। देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता है।

डॉ.राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 में बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था।उनके पिता का नाम महादेव सहाय और माता का नाम मलेश्वरी देवी था। राजेन्द्र प्रसाद जी की प्रारंभिक शिक्षा छपरा (बिहार) के जिला स्कूलसे हुई थी। उन्होंने 18 साल की उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा प्रथम जगह से पास की। फिर विश्वविद्यालय की तरफ उन्हें 30 रुपये की स्कॉलरशिप दी गई। इसके बाद 1915 में राजेंद्र बाबू ने कानून में मास्टर की डिग्री हासिल की। इसी के साथ ही उन्होंने कानून में ही डाक्टरेट भी किया। राजेंद्र प्रसाद शुरु से ही पढ़ाई लिखाई में अच्छे थे। एक बाक उनकी एग्जाम शीट को देखकर एक एग्जामिनर ने कहा था कि ‘ Examinee is better than Examiner’। डॉ.राजेंद्र प्रसाद की विवाह 13 साल की उम्र में ही राजवंशी देवी से हो गया था।

आज डॉ.राजेंद्र प्रसाद पेशे से वकील हुआ करते थे। आजादी के संघर्ष में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शुमार रहे। उन्‍होंने महात्‍मा गांधी की प्रेरणा से वकालत छोड़कर स्‍वतंत्रता संग्राम में उतरने का फैसला किया। उन्होंने गांवों में गरीबों और दीन किसानों के बीच काम करना स्वीकार किया। राष्ट्रपति बनने के बाद कई सामाजिक कार्य किए। इसी के साथ ही उन्होंने कई सरकारी दफ्तरों की स्थापना की। उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था ताकि वह स्‍वतंत्र ढंग से काम कर सके। यह एक ऐसी मिसाल थी जो बाद में परंपरा बन गई और अभी भी यह परंपरा जारी है।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रेरणादायक बातें

  • डॉ.राजेंद्र प्रसाद राष्‍ट्रपिता गांधी से बेहद प्रभावित थे। राजेंद्र प्रसाद को ब्रिटिश प्रशासन ने 1931 में ‘नमक सत्याग्रह’ और 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान जेल में डाल दिया था।
  • आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत को गणतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिलने के साथ राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने। इसके बाद 1957 में वह दोबारा राष्ट्रपति चुने गए। डॉ.राजेंद्र प्रसाद एकमात्र ऐसे नेता रहे जिनको 2 बार राष्ट्रपति के लिए चुना गया। 12 साल तक इस पोस्ट पर बने रहने के बाद वे 1962 में राष्ट्रपति पोस्ट से हटे।
  • 25 जनवरी 1950 को राजेंद्र प्रसाद की बहन भगवती देवी का निधन हो गया था औऱ उसके अगले दिन यानी 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने जा रहा था। ऐसे में राजेंद्र प्रसाद भारतीय गणराज्य के स्थापना के बाद ही दाह संस्कार में भाग लेने गए।
  • इसी के साथ 1962 में राष्ट्रपति पोस्ट से हट जाने के बाद राजेंद्र प्रसाद को भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया।

कंचन मौर्य

 

 

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