Monday, December 3, 2018

राज ठाकरें नें अब हिंदी भाषा में धमकाया कहा…

राज ठाकरें नें अब हिंदी भाषा में धमकाया कहा...

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(मनसा) के अध्यक्ष और बाल ठाकरें के बेटे राज ठाकरे हमेशा से ही मराठिय़ों को ज्यादा बड़ा मानते है और हिंदी का विरोध करते ही आए है और इसीलिए कई हिंदूभाषी लोग उनके खिलाफ भी रहते है।और अभी हाल ही में पहली बार राज ठाकरे नें हिंदू सभा को संबोधित किया और सब लोग यह जान कर हैरान हो गए की पहली बार राज ठाकरे नें हिंदी में भाषण दिया और यह माना जा रहा था कि उनका नज़रिया बदल गया है लेकिन उनहोनें इस भाषण के अंत में हिंदी भाषी लोगों को एक बार फिर से ललकारते हुए कहा कि हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा नहीं होना चाहिये और इसी के चलते उन्होंनें एक बार फिर से मराठी को हिंदी से अच्छा बता दिया।

उत्तर भारतीय महापंचायत में ठाकरे ने कहा कि राष्ट्रभाषा को लेकर कभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, ‘हिंदी भाषा अच्छी है। सच कड़वा होता है लेकिन सही होता है हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है क्योंकि राष्ट्रभाषा का निर्माण कभी हुआ ही नहीं। जैसे हिंदी भाषा है, वैसे तमिल, मराठी, गुजराती भाषा है। हिंदी की तरह ही ये भी इसी देश की भाषाएं ही हैं।’

ठाकरे ने मराठा आरक्षण पर कहा कि यदि महाराष्ट्र में रोजगार के मौके हैं तो क्या यह गलत है कि महाराष्ट्र के युवाओं को प्राथमिकता दी जाए? उन्होंने कहा, ‘यदि कल को उत्तर प्रदेश में कोई उद्योग स्थापित होता है तो वहां के युवाओं को रोजगार के लिए प्राथमिकता मिलनी चाहिए, यही बिहार में भी होना चाहिए, इसमें गलत क्या है?’

ठाकरे ने कहा कि देश को अपने संविधान और कानून के बारे में समझना चाहिए। अगर आप एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं तो पहले पुलिस थाने में जाकर जॉब के लिए सर्टिफिकेट लेना होता है। उन्होंने कहा कि मैं यहां पर यह साफ करने आया हूं कि अगर महाराष्ट्र में नौकरियां है तो उस पर पहला हक मराठियों का है। ठीक उसी तरह जैसे यूपी-बिहार में नौकरी होती तो पहला हक वहां के रहने वाले लोगों का होता।

मराठी न बोलने पर होने वाले विवाद पर राज ठाकरे ने कहा कि पहले आप जहां जाते हैं तो आपको वहां की भाषा सीखनी चाहिए। क्या आप विदेश में जाकर हिंदी में बात करते हैं। असम में बिहार के रहने वाले एक शख्स की हत्या की गई। वहां आंदोलन हुआ। गुजरात से यूपी-बिहार के लोगों को भगाया गया, लेकिन मीडिया को यह नहीं दिखाई दिया।

यूपी-बिहार के लोगों मिलने वाले कम तनख्वाह के सवाल पर ठाकरे ने कहा कि यह समस्या मराठियों के साथ भी है। कई लोग गैर-कानूनी तरीके से अपना व्यवसाय करते हैं। आपको यह खुद समझना पड़ेगा।

राज ठाकरे के बयानों से यह लगता है कि उनकी सोच में ठोड़ा बदलाव जरूर आया है लेकिन फिर भी वह भारत के होकर भी हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने के पक्ष में नहीं है और इसके साथ ही यह भाषण मराठियों के लिए ही था जो हिंदी मंच पर बोला गया था।

 

आप इस बार के चुनाव में किसे वोट देंगे &#8211 अभी वोट करें

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

No comments:

Post a Comment