Monday, December 3, 2018

राजस्थान के रण में बीजेपी को टक्कर देने तीन दशक बाद ‘घर’ लौटे कांग्रेस के सीपी जोशी और गिरिजा व्यास

उदयपुरः राजजगह में भाजपा और कांग्रेस के बीच जबर्दस्त चुनावी टक्कर है. दोनों पार्टियां एक दूसरे को मात देने के लिए तरकश में मौजूद सारे तीर निकाल चुकी हैं. तभी तो कांग्रेस के दिग्गज नेता सीपी जोशी राजसमंद जिले के नाथद्वारा सीट से 38 साल बाद विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं 72 साल की वरिष्ठ नेता गिरिजा व्यास 33 साल बाद उदयपुर सिटी सीट से प्रत्याशी बनी हैं. जोशी और व्यास दोनों पार्टी के राष्ट्रीय चेहरा रहे हैं. जोशी ने 1980 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था.

पहली चुनावी जीत के बाद से जोशी और व्यास कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे. 2008 में जोशी राज्य के मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए थे क्योंकि उस वक्त वह नाथद्वारा से केवल एक वोट से चुनाव हार गए थे. उसके बाद वह 2009 में यूपीए-2 की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और कांग्रेस के महासचिव बने. उनके पास 11 राज्यों का प्रभार था. जोशी, राहुल गांधी के करीबी रहे लेकिन जब वह (राहुल गांधी) पार्टी अध्यक्ष बने और अपनी टीम बनाई तो उन्हें उसमें नहीं रखा. कुछ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजजगह के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने जोशी को विधानसभा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जोशी ने कहा कि वे सभी लोग भाजपा को हराना चाहते हैं. जब वह केंद्रीय मंत्री थे तो उन्होंने राजसमंद के लिए सबसे बड़ी पेयजल परियोजना की शुरुआत करवाई. उन्होंने उदयपुर-नाथद्वारा रोड को चार लेन करवाया. लोग जानते हैं कि वह उनके बेटे हैं और उनके विधानसभा चुनाव लड़ने से वे खुश हैं.

जोशी ने चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति को लेकर टिप्पणी की थी जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तक को अपनी पार्टी की स्थिति को लेकर स्पष्टीकरण देना पड़ा था. इस बारे में जोशी ने कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में पेश किया गया. चुनाव आयोग ने उन्हें क्लिन चिट दे दिया है. भाजपा ने कांग्रेस से बगावत करने वाले महेश प्रताप सिंह को जोशी के खिलाफ मैदान में उतारा है. सिंह के चाचा शिव धन सिंह नातेद्वार से दो बार भाजपा के विधायक रह चुके हैं.

दूसरी तरफ गिरिज व्यास राजजगह के गृह मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता गुलाब चंद कटारिया के खिलाफ उदयपुर सिटी से मैदान में है. इस सीट पर कटारिया 1977 के बाद अब तक पांच बार जीत चुके हैं. इस बारे में व्यास कहती हैं कि उन्होंने कटारिया को लोकसभा और विधानसभा दोनों में हराया है. उन्होंने कहा कि वह 2008 में चितौड़ चली गई थीं, लेकिन वह उदयपुर की बेटी हैं. व्यास कटारिया के खिलाफ उभरे असंतोष और भाजपा के बागी दलपत सुराणा की बदौतल जीत को लेकर आश्वस्त है. कांग्रेस के एक कार्यकर्ता का कहना है कि सुराणा यहां बनिया और जैन समुदाय का वोट काट सकते हैं. उदयपुर सिटी में करीब 50 हजार जैन वोटर हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस का वोट बंटता हुआ नहीं दिख रहा है.

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