Tuesday, February 12, 2019

Analysis: राजनीति में सोशल मीडिया मजबूरी और जरूरत दोनों

लखनऊ। राजनीति में मजबूरी और जरूरत दो शब्द पूरी तस्वीर बदल देते हैं। राजनीति में मजबूरी और जरूरत नेता और दल दोनों को बदलने पर मजबूर कर देते हंै। मौजूदा वक्त में राजनीति में सोशल मीडिया का प्रयोग मजबूरी भी है और जरूरत भी है। सोशल मीडिया ही एक मात्र ऐसा प्लेटफार्म है, जिसकी मदद से नेता अब आसानी से लोगों के बीच पहुंच सकते हैं। यही वजह है अब सोशल मीडिया से कोई भी नेता और पार्टी दूर नहीं है। छोटी सी छोटी पार्टी हो या फिर देश की सत्ता पर आसीन दल, हर किसी को हर सोशल मीडिया की जरुरत पड़ रही है।

लोकसभा चुनाव 2019 करीब आ रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया के प्लेटफार्म को बड़े पैमाने पर प्रयोग हो रहा है। इस वक्त राजनीति मेें सोशल मीडिया सबसे प्रभावी हथियार माना जाता है। शायद यही वजह है कि बसपा सुप्रीमो मायावती जैसी हस्ती को भी सोशल मीडिया की दुनिया में अपना कदम रखना पड़ा। दशकों से राजनीति में सक्रिय मायावती ने कभी भी इस तरह के हथियार का प्रयोग नहीं किया था।

वह हमेशा से मीडिया से दूर ही रहती थीं, पर इस बार शायद उनको भी इस बात का एहसास हो गया कि बिना सोशल मीडिया के प्रयोग किये बिना वह जनता तक अपनी बात नहीं पहुंचा सकती हैं। यही वजह ही कि चंद रोज पहले बसपा सुप्रीमो ने ट्विटर पर अपना आफिशियल एकाउंट बनाया। माया ने सिर्फ ट्विटर पर एकाउंट ही नहीं बनाया बल्कि कई ट्विट भी किये। ठीक इसी तरह कांग्रेस पार्टी में इंट्री कर चुकी प्रियंका गांधी ने भी किया।

कांग्रेस की महासचिव नियुक्त की गयी प्रियंका गांधी वाड्रा ने कुछ ही दिन पहले अपना आफिशियल ट्विटर हैण्डल बनाया। फिलहाल प्रियंका गांधी ने अभी तक अपने ट्विटर हैण्डल से कोई ट्विट नहीं किया है पर चंद रोज पहले ही बने इस एकाउंट को अब तक हजारों लोग फालो करने लगे हैं।

खुद प्रियंका गांधी ने पार्टी से जुड़े सात लोगों को फालो किया है। इसमें प्रियंका के भाई राहुल गांधी भी शामिल हैं। कुछ साल पहले दिल्ली में अन्ना हजारे के आंदोलन को सफल बनाने के लिए उनकी टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म का प्रयोग किया था। सोशल मीडिया की मदद से अन्ना के आंदोलन को काफी लोकप्रियता मिली थी। बस इसी के बाद राजनीति में भी सोशल मीडिया के प्रयोग को ऐसी हवा मिली कि मौजूदा वक्त में हर बड़ा और छोटा नेता सोशल मीडिया पर एक्टिव है।

वर्ष 2013 में भाजपा ने सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर प्रयोग शुरू किया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी को इस सोशल मीडिया से रातों रात इतनी शोहरत मिली और मोदी लहर ने भाजपा को सत्ता की चाभी थमा दी। राजनीति के जानकार बताते हैं कि मौजूदा समय में राजनीति में सोशल मीडिया मजबूरी भी है और जरूरत है। मजबूरी इसलिए क्यों दूसरी पार्टियां और नेता का सोशल मीडिया के प्रयोग, जरूरत इसलिए क्यों क्योंकि इससे आसान और प्रभावी कोई दूसरा प्लेटफार्म मौजूद नहीं है।

अधिकतर दलों के पास है सोशल मीडिया टीम
राजनीति में सोशल मीडिया के प्रयोग का चलन इस कदर बढ़ा कि मौजूद वक्त में देश की कई पार्टियों के पास अपना सोशल मीडिया सेल है। इस में सबसे पहला नाम केन्द्र की सत्ता में मौजूद भाजपा का है। बीजेपी के पास सोशल मीडिया को हैण्डल करने के लिए बहुत बड़ी फौज है। वहीं कांग्रेस पार्टी भी अब इसी राह पर है। कांग्रेस ने भी अपना सोशल मीडिया सेल बना रखा है। यूपी की अगर बात की जाये तो पूर्व सीएम अखिलेश यादव और उनकी पार्टी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव है। इस तरह देश के हर बड़े नेता सोशल मीडिया पर एक्टिव हंै। कई ने तो अपना सोशल मीडिया हैण्डलिंग का काम एजेंसियों को दे रखा है।

कुछ नेताओं व पार्टी के सोशल मीडिया फालोवार पर नज़र डालिये
पीएम नरेन्द्र मोदी- 45.4 मीलियन फालोवर
राहुल गांधी- 8.47 मीलियन फालोवर
गृह मंत्री राजनाथ सिंह-12.1 मीलियन फालोवर
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज- 12.1 मीलियन फालोवर
योगी आदित्यनाथ-3.33 मीलियन फालोवर
अखिलेश यादव- 9.01 मीलियन फालोवर
अरविंद केजरीवाल-14.4 मीलियन फालोवर
ममता बनर्जी-3.11 मीलियन फालोवर
भाजपा नेता सुब्रमणियम स्वमी- 7.58 मीलियन फालोवर
लालू प्रसाद यादव-4.58 मीलियन फालोवर
बसपा सुप्रीमो मायावती- 76,413 फालोवर
भाजपा पार्टी- 10.5 मीलियन फालोवर
कांग्रेस पार्टी- 4.83 मीलियन फालोवर
समाजवादी पार्टी – 79 हजार फालोवर

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