Tuesday, March 12, 2019

लेडी लक के भरोसे नैया पार लगाने में जुटी कांग्रेस

 

लखनऊ। इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राहुल गांधी से ज्यादा प्रियंका गांधी पर भरोसा है। उन्हे महासचिव बनाने के साथ पूर्वाचल का प्रभारी बनाने के बाद से कांग्रसियों को उम्मीद है. कि इस बार वह उन्हीं के भरोसे उनकी चुनावी वैतरणी पार लगेगी हालांकि यह बात दीगर है कि महासचिव की जि मेदारी मिलने के बाद ही प्रियंका गांधी का बयान आया कि उनसे किसी करिश्में की उम्मीद न रखी जाएं। कांग्रेस ने प्रियंका ट्रप कार्ड राहुल के फेल होने के बाद खेला है पिछले विधानसभा चुनाव में राहुल ने यूपी में खासी मशक्कत की थी नतीजा यह रहा कि पार्टी आज विधानसभा में सात सीटो पर सिमट गयी। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मात्र दो सीटो पर ही सिमट गयी थी।

जिनमें राहुल और सोनिया ही मोदी लहर में अपना गढ़ बचा पाए थे। पिछले विधानसभा चुनाव से पूर्व प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने लगातार 48 दिन डेरा जमाए रखा था और 211 रैलियां और 18 बड़े रोड शो किए थे। इसके बावजूद कांग्रेस और रालोद गठबन्धन 40 सीटों का भी आंकड़ा नहीं छू पाया था। इसके पहले 2007 में कांग्रेस के पास 21 सीटे थी। लेकिन 2012 में वह केवल 28 सीटों का ही आंकड़ा छू सकी। कांग्रेस को राहुल गांधी के अमेठी में 2 तथा सोनिया गांधी के लोकसभा क्षेत्र रायबरेली में एक भी विधानसभा सीट नहीं मिल सकी थी। 2017 के लोकसभा चुनाव में भी राहुल गांधी ने यूपी में खासी मशक्कत की थी उन्हे खाट सभाएं की गांवों में जाकर चौपाल लगाकर किसानों से चर्चा की बावजूद इसके वह विधानसभा में दहाई का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाए थे। इस बार के लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी को आगे लाकर कांग्रेस ने एक तरह से अपना ब्रहास्त्र फेंका है।

आम आवाम में भले प्रियंका को लेकर कोई उत्साह न हो लेकिन कांग्रेस को लग रहा है कि प्रियंका के रूप में उनके पास वह अलादीन चिराग है कि जो बाकी दलों को अंधेरे में ढकेलने में कारगर रहेगा। हालांकि पार्टी के ही लोगों की माने तो पिछले दो विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव में दोनों ने खासा पसीना बहाया था लेकिन अपेक्षा के अनुसार कांग्रेस को सीटे नहीं मिल पाई थी। इससे साफ है कि सूबे में गांधी परिवार का जादू टूट रहा है। प्रियंका गांधी अब भले ही महासचिव के रूप में पूर्वाचल की जि मेदारी निभाने को मैदान में उतरी हो लेकिन पिछले कई चुनावों में अमेठी रायबरेली में अपनी मां और भाई के लिए कै पेनिग करने आती रही है। पिछले लोकसभा के चुनाव में भी उन्होंने खासी सक्रियता दिखायी थी उसके बाद ही कांग्रेस अमेठी और राहुल की सीट बचा पायी थी।

पिछले साल पांच राज्यों के हुए चुनाव में तीन राज्यो में मिली सफलता के बाद भी कांग्रेस को राहुल को ज्यादा से प्रियंका पर भरोसा है इसीलिए इस बार के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बिना जोखिम उठाए यूपी की जि मेदारी प्रियंका और ज्योतिरादित्य को सौपी है। प्रियंका और ज्योतिरादित्य को लेकर कांग्रेस अतिआत्मविश्वास से इतनी अभिभूत है कि उसने इस चुनाव में किसी से महागठबंधन में शामिल होने से मना कर दिया है। कांग्रेस पहले से ही अकेले दम पर लोकसभा चुनाव लडऩे की बात कह रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा साथ थी गठबंधन करने जो कांग्रेस ने खामियाजा भुगता उसको लेकर वह आज तक नहीं उबर पा रही है।

पिछले विधानसभा चुनाव में सपा कांग्रेस गठबंधन में सपा ने करीब तीन सौ सीटे लेकर कांग्रेस को करीब सौ से कुछ ज्यादा सीटे दी थी जिसमें सपा को 47 तो कांग्रेस को मात्र सात सीटे मिली थी। इससं पहले 1996 में कांग्रेस और बसपा के हुए गठबंधन में बसपा ने तीन सौ सीटे लेते हुए कांग्रेस को सवा सौ सीटे मिली थी बसपा कांग्रेस के इस गठबंधन में कांग्रेस से ज्यादा सीटे बसपा को मिली थी। पिछले इन दो अनुभवों को देखते हुए कांग्रेस ने महागठबंधन में शामिल होने से तौबा कर ली है। उसे लगता है कि वह प्रियंका गांधी को साथ लेकर महागठबंधन के साथ-साथ भाजपा से निपटने में सक्षम है।

 

लखनऊ से योगेश श्रीवास्तव

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