Tuesday, April 16, 2019

दवाइयों की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़, शुगर, सिरदर्द की 50 दवाइयों के सैंपल फेल

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अगर डॉक्टर को भगवान का दर्जा दें तो दवाइयां किसी अमृत से कम नहीं है क्योंकि उन्हीं दवाइयों के जरिए किसी को दोबारा जिंदगी मिल सकती है, कोई खुद को स्वस्थ रख सकता है लेकिन तब क्या हो जब उसी अमृत समान दवाइयों की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया जाए. तब क्या हो जब किसी दिन ये पाता चले कि हम जिन दवाइयों का सेवन कर रहे हैं वो नकली हैं. डरिए नहीं क्योंकि एक खबर के जरिए हम बस आपको दवाइयों की गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी देना चाहते हैं ताकि आप भी जान सके कि किस तरह से दवाइयों के साथ खिलवाड़ कर लोगों की जिंदगीं की सलामती के साथ खिलबाड़ किया जा रहा है.

एक रिपोर्ट पर गौर करें तो देश के इंडस्ट्रिज में बनी कई खातक बीमारियों से जुड़े 50 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं. दवाइयां शुगर, सिरदर्द और अन्य कई बीमारियों से जुड़ीं है. जानकारी ये भी हैं कि इनमें से 20 दवाएं हिमाचल में बनायी जाती हैं.

दरअसल, जब इन दवाइयों का परिक्षण किया गया तो पाया गया कि ये दवाएं नकली, कम गुणवत्ता वाली तो हैं ही इसके साथ-साथ ये खराब भी हैं. अब इनके परिक्षण के बाद जो बातें सामने आयी है उसे लेकर केंद्र के सीडीएससीओ यानी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन सतर्क हो गया है और सभी राज्यों के दवा नियंत्रकों से रिपोर्ट मांगी है. इतना ही नहीं सावधानी बरतते हुए इन दवाओं को भारत और बाहर के देशों से भी वापसी करने का आदेश जारी कर दिया गया है.

दवाओं के सेंपल का परिक्षण तो अक्सर ही होता हैं लेकिन इसमें अलग क्या है. दरअसल, इससे पहले हुए ड्रग अलर्ट में प्रदेश में 10 या फिर ज्यादा से ज्यादा 15 दवाइयों के सैंपल फेल होते हैं लेकिन इस बार सवाल और संदेह पैदा होने की वजह ये है कि दवाइयों के सैंपल के खराब होने का ये आंकडा बढ़ता ही जा रहा है. ये जानकारी इसलिए भी काफी गंभीर हो जाती है क्योंकि जो सैंपल फेल हुए हैं वो शुगर, बेक्टिीरियल इंफेक्शन, अस्थमा, स्किन इंफेक्शन, सिरदर्द जैसी कई दिक्कतों और बीमारियों की दवाइयों के हैं.

आपको आगे विस्तार से बताते हैं कि हिमाचल में बनी किन किन दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल और संदेह है. सवालों के घेरे में ऊना जिला के स्विज गार्नियर उद्योग की दवा प्रीचेक और सोलन के घट्टी स्थित चिरोस फार्मा में निर्मित मोक्सोडिन हैं. तो वहीं बद्दी स्थित समर्थ लाईफ सांइस में निर्मित विट और बद्दी की एक्वा विटाई लेबोरेट्री की दवा कोलिस्ट के सैंपल भी फेल हो गए. इसके बाद नालागढ़ के थियोन फार्मास्यूटिकल में निर्मित लूकॉस्ट एलसी, सोलन के घट्टी स्थित चिरोस फार्मा में निर्मित एलमोक्स सीवी और कान्हा बायोजेनेटिक्स कंपनी बद्दी की सिफिडोक के सैंपल भी परिक्षण में खरे नहीं उतरे.

बद्दी के ही आयोन हेल्थकेयर की बनी लेक्सीनेट टैबलेट, सिरमौर के कालाअंब स्थित ओरिसन फार्मा की दवा आमेक्सिलिन और सिरमौर के ही पांवटा साहिब स्थित एसवीआर हेल्थकेयर की दवा सिफूरोक्सिम का सैंपल भी संतोषजनक नहीं रहा. इसके बाद कालाअंब स्थित ओस्कर रेमीडीज की दवा, कालाअंब स्थित डिजिटल विजन और बरोटीवावाला जिला सोलन स्थित अल्ट्राटेक फार्मास्यूटिकल भी खुद को सही साबित नहीं कर सका। ओशीन लैबोरेट्री, एमसी फार्मास्यूटिकल पावंटा साबित, सीएमजी बायोटेक संसारपुर टैरेस कांगडा और हनुचैम लैबोरेट्री परवाणू के सैंपल भी परीक्षण में फेल हो गए. इसी तरह नालागढ़ के एलाइस हेल्थकेयर, पोलेस्टार पॉवर बद्दी और सिवरोन फार्मास्यूटिकल में निर्मित दवाओं के नमूने खरे नहीं उतर पाए.

इन सभी खराब दवाओं की वापसी कर नष्ट करने का आदेश जारी कर दिया गया है। इतना ही नहीं लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने को लेकर प्रदेश की संबंधित दवा कंपनियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि जैसे जैसे मौसम में बदलाव हो रहा है वैसे वैसे दवाओं की सैंपल परिक्षण में फेल होने की मात्रा बढ़ती जा रही है. यहां तक कि नौबत तो ये भी आ गयी कि कुछ कंपनियों के लाइसेंस तक रद्द कर दिए गए.

दवाइयों के 50 सैंपल का फेल हो जाना कोई छोटी बात नहीं है, लोगों की जान और सेहत के साथ इतने बड़े मजाक को बेहद गंभीरता से लेने की जरूरत है. ऐसे में देखना ये होगा कि शासन-प्रशासन इस संबंध में आगे और क्या कार्रवाई करता है.

 

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