Wednesday, April 17, 2019

एक्शन मोड में चुनाव आयोग, आजम खान और मेनका गांधी को भी किया बैन

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लोकसभा चुनाव है तो बयानबाजियां भी होंगी. कुछ तीखी, कुछ धारदार और कुछ विवादित लेकिन बयान देने की सीमाओं को तय करने और बयान देने की सीमा को पार करने पर टकटकी लगाकर बैठा चुनाव आयोग नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भी करेगा. इस बात को आयोग ने तब सच साबित कर दिया जब उसने बीजेपी के स्टार प्रचारक और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा बीएसपी प्रमुख मायावती को उनके भड़काऊ बयानों के चलते बैन कर दिया. इस कार्रवाई तक आयोग पूरी तरह से एक्शन में आ गया था और एक के बाद एक नेताओं के खिलाफ ऐसी ही कार्रवाई करता चला गया कि थमने का नाम ही नहीं लिया.

दरअसल, चुनाव आयोग ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ही दिन में 4 दिग्गज नेताओं पर बैन लगाया. आयोग की ये कार्रवाई भड़काऊ भाषण के लिए की गयी. इस फेहरिस्त में आयोग ने सीएम और मायवती को बैन किया और इसके बाद शाम होते होते एक बड़े नेता पर गाज गिरी. आयोग ने सपा नेता आजम खान पर भी बैन कर दिया. कार्रवाई यहीं नहीं थमी ऐक्शन मोड में आया आयोग केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता मेनका गांधी के भी चुनाव प्रचार करने पर रोक लगा दी. तो आइए आपको बताते हैं कि किस नेता को कितनी सजा सुनायी गयी है.

नेताओं को सुनाई गई ये सजा

आजम खान को 72 घंटे, मेनका गांधी को विवादित बयान के लिए 48 घंटे के लिए बैन किया गया है. इन दोनों नेताओं पर यह प्रतिबंध 16 अप्रैल सुबह 10 बजे से लागू होगा. इसके अलावा सीएम योगी को भी 72 घंटे तो वहीं मायावती को 48 घंटे तक चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध लगाया गया है.

आपको ये जान लेना चाहिए कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर लोकसभा सीट से सपा के उम्मीदवार आजम खान ने जया प्रदा का बिना नाम लिए ऐसी शर्मनाक बयानबाजी की थी, जिसे हम आपको सार्वजनिक रूप से बता भी नहीं सकते हैं. रविवार, 14 अप्रैल को दिए गए आजम खां के आपत्तिजनक बयान ने उनकी काफी निंदा करवायी थी.

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने जोकी सुल्तानपुर से बीजेपी की उम्मीदवार हैं उन्होंने भी अपनी रैली के दौरान विवादित बयान दिये थे. एक बयान में तो मेनका गांधी कथित रूप से मुसलमान वोटरों को धमकाती हुई दिखी तो दूसरे बयान में उन्होंने सुल्तानपुर की जनता को वोट और काम का गणित बताते हुए कहा था कि जिस इलाके से उन्हें सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे. तो सबसे पहले उसी का काम होगा.

हम आपको मायावती और योगी के बयान को भी याद दिला देते हैं कि आखिर किस बयान के लिए आयोग ने उन्हें बैन किया है. मायावती ने यूपी के देवबंद में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों से वोटों के लिए अपील की थी और कहा था कि मुस्लिम समुदाय के लोग अपना वोट बंटने ना दें और सिर्फ महागठबंधन को ही सारे वोट दें. तो वहीं सीएम योगी ने अपने एक संबोधन में मायावती पर उनके दिए गए बयान को लेकर हमला करते हुए कहा था कि अगर विपक्ष को अली पसंद है, तो हमें बजरंगबली पसंद हैं.

जानकारी दे दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते सोमवार की सुबह ही मायावती के द्वारा देवबंद की रैली में दिए गए भड़काऊ भाषण से उनपर आपत्ति व्यक्त की थी. कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगायी थी और कहा था कि आयोग अब तक सिर्फ नोटिस ही जारी कर रहा है बल्कि इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. फिर आयोग ऐक्शन में आया और ताबड़तोड़ कार्रवई की साथ ही जाने माने और वरीष्ठ नेताओं के चुनाव प्रचार पर बैन लगा दिया.

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