Monday, April 15, 2019

शब्दों की मर्यादा तोड़ आजम खान ने जया प्रदा को लेकर दिया ऐसा शर्मनाक बयान कि आप भी चौक जाएंगे

jaya prada, azam khan

उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट चुनावी जंग का मैदान कम और जुबानी जंग का मैदान ज्यादा लगता है क्योंकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आजम खान और भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार जया प्रदा के एक दूसरे पर किए जाने वाले वार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने जया प्रदा का नाम तो नहीं लिया लेकिन इस बार भी वो सुर्खियों में इसी वजह से हैं क्योंकि उन्होंने फिर एक विवादित बयान दिया है या यूं कहें कि आपत्तिजनक बयान देने की सारी हदें पार कर दी. जिसके चलते उनकी चौतरफा निंदा की जा रही है.

जया प्रदा का जिक्र किए बिना उन्होंने कहा कि जिसको हम उंगली पकड़कर रामपुर ले आए, आपने 10 साल तक जिनसे प्रतिनिधित्व करवाया. उसकी असलियत जानने में आपको 17 साल लग गए. मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनका *$#@!^& खाकी रंग का है.

आजम खान को ऐसा भले ही लगता हो कि वो जया प्रदा पर इस तरह के आपत्तिजनक बयान देकर निकल जाएंगे और किसी की नजर नहीं पड़ेगी तो उनकी यो सोच गलत है क्योंकि आजम खान की मुश्किलें राष्ट्रीय महिला आयोग ने बढ़ा दी है. समाजावादी पार्टी के नेता को नोटिस भेजकर जवाब तलब करने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग तैयार है और इस नोटिस के जरिए वो आजम खान से जवाब मांगेगा. इसके अलावा आजम खान के इस बयान के लिए जिला मजिस्ट्रेट की तहरीर पर केस दर्जकर लिया गया है.

रविवार को आजम खां रामपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे कि इसी दौरान उन्होंने कहा कि “मैं जनसभा में मौजूद सभी लोगों से सवाल करता हूं कि क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी कि 10 बरस जिसने रामपुर वालों का खून पीया, जिसे उंगली पकड़कर हम रामपुर में ले आए. जिसका हमने पूरा ख्याल रखा. उसने हमारे ऊपर क्या-क्या आरोप नहीं लगाए.” गौर करने वाली बात ये है कि आजम खान ने इस तरह की शर्मिदगी भरा बयान पूर्व मुख्यमंत्री और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की मौजूदगी में ही दी है.

तो दूसरी तरफ विवादित यान देने पर खुद को हर ओर से घिरता देख खान ने जया प्रदा पर दिए अपने विवादित बयान पर सफाई दी है या यू कहें कि चोरी ऊपर से सीनाजोरी की है. आजम ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि “मैं नौ बार रामपुर से विधायक और मंत्री रहा हूं. मुझे पता है कि क्या बोलना है. अगर कोई साबित कर दे कि मैंने अपने बयान में किसी का नाम लिया या किसी का अपमान किया तो मैं चुनाव से अपने कदम पीछे खींच लूंगा.”

आजम ने वार किया तो जया पलटवार आना तो तय था ही. आजम खान के विवादित बयान पर जया प्रदा ने अपना हथियार बनाया और जनता से अपील कर बैठीं कि बेटियों के जुल्म के खिलाफ लोगों को लड़ना होगा. उन्होंने एक महिला के लिए ऐसा बयान देने पर आजम खां को घेरते हुए कहा कि “मुझे गाली दी, मैं उस जुबान को बर्दाश्त नहीं कर पा रही. बेटियों के जुल्म के खिलाफ लोगों को लड़ना होगा. एक वोट भी आजम खान को नहीं जाना चाहिए.”

अब बात सपा नेता से जुड़ी थी तो सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक आंच कैसे नहीं आती. जया ने तो झट से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी लपेट में ले लिया और कहा कि “उनका दिमाग जलील बातें करने लगा है. अखिलेश तुम्हारे अंदर भी संस्कार खत्म हो गए हैं, जिस नेता के साथ तुम रहते-रहते जिस संगत में रहते हो, तुम्हारा भी वही दिमाग जलील बातें करने लगा है.”

जया प्रदा ने जनता से अपना दर्द बयां करते हुए आजम खां पर वार किया और कहा कि “मेरी तकलीफ सुनिए. लोगों को मुझसे दुश्मनी क्यों हैं, ये मुझे पता नहीं है. उन्हों ने शाहाबाद की तकरीर में मुझे बहुत गाली दी. एक औरत होकर मैं वो बातें नहीं कर पा रही हूं. आपको वीडियो देखना होगा. भाई होने पर लानत है. आपके घर में बहन है आपके घर में बहू है. आपके घर में मां है. आपकी बहन और बेटी को वह गाली देते रहेंगे तो क्या आप चुप रहेंगे.”

वे यहीं नहीं रुकी उन्होंने आजम खां को कहा कि “ऐसी गंदी जुबान, मेरी मां ने मुझे संस्कार दिया इसलिए मैं उस जुबान को बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूं. सीमा पार कर दिया है. अगर मुझे बहन समझते हैं, मुझे बेटी समझते हैं तो मैं आपसे अपील करती हूं कि बेटियों के जुल्म के खिलाफ आपको लड़ना होगा.”

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने आजम खां के इस आपत्तिजनक बयान के बाद भी सपा संरक्षक मुलायम सिंह के मौन साध लेने पर उन्हें भीष्म पितामह के रूप में संबोधित किया है. सोमवार की सुबह सुषमा स्वराज ने अपने ट्विटर एकाउंट से ट्वीट कर लिखा कि “मुलायम भाई, आप समाजवादी पार्टी के पितामह हैं. आपके सामने रामपुर में द्रौपदी का चीर हरण हो रहा हैं. आप भीष्म की तरह मौन साधने की गलती मत करिए.”

देखने वाली बात ये है कि रामपुर सीट से दो अलग अलग पार्टी के उम्मीदवारों की चुनावी तकरार और वार-पलटवार तक तो ठीक था लेकिन ऐसा लगता है कि चंद वोट के लिए आजम खां एक महिला की बेइज्जती करने से भी बांज नहीं आ सकते भले ही उन्होंने जया प्रदा का नाम न लिया हो लेकिन नाम न लेने की शर्त पर क्या वो इस तरह की बयानबाजी करने का हक पा लेते हैं? इस बड़े सवाल का जवाब ही एक बड़े बहस का विषय है.

 

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