Wednesday, April 17, 2019

बीजेपी ने खेला ब्राह्मण दांव, गोरखपुर सीट से रवि किशन को दिया टिकट

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पहले निरहुआ और अब बीजेपी ने गोरखपुर सीट के लिए रवि किशन पर भरोसा जताया है। दरअसल बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल की आठ लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी जिसमें एक नाम भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन का नाम भी दर्ज है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर लोकसभा सीट के लिए बीजेपी एक ऐसे चेहरे की तलाश में थी जो वहां के जातीय समीकरण पर फिट बैठे और इसके लिए उसके सामने भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन शुक्ला का विकल्प था जिसे अब पार्टी आजमाना चाहती है। इसके लिए पार्टी ने ब्राह्मण दांव खेलते हुए रवि किशन को गोरखपुर से चुनाव लड़ने का टिकट दे दिया।

पहले तो ऐसी चर्चाएं थीं कि गोरखपुर लोकसभा सीट पर गोरखपुर के मौजूदा सांसद प्रवीण निषाद को बीजेपी अपना उम्मीदवार बना सकती है लेकिन चर्चाओं के विपरीत निषाद को संतकबीर नगर सीट से उम्मीदवार बना दिया। निषाद पार्टी समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गयी।

रवि किशन के बारे में बात करें…. उससे पहले आपको निषाद पार्टी के प्रवीण निषाद के बारे में एक अहम जानकारी दे देते हैं। दरअसल, फूलपुर और गोरखपुर में हुए लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा था जो एक बड़ी हार के रूप में जानी जाती है और ऐसे में इन दोनों ही सीटों पर सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिष्ठा पर प्रश्न उठने लगा। विधानसभा में हार के बाद हुई इस जीत ने विपक्ष को यूपी के अंदर फिर से राहत की सासें भरवायी थी। इतना ही नहीं गोरखपुर में जीत के साथ ही निषाद पार्टी रातों रात चमक गयी।

इसके बाद हम आपको बीजेपी जातीय समीकरण को समझाते हैं और बताते हैं कि निषाद पार्टी और रवि किशन के जरिए इस बार गोरखपुर के लिए पार्टी ने क्या रणनीति तैयार की है। गोरखपुर में अपनी साख को बरकरार रखने के लिए योगी आदित्यनाथ के सामने एक बेहद बड़ी चुनौती है क्योंकि एसपी-बीएसपी से निपटना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं लेकिन गोरखपुर के चुनाव में निषादों से पार पाना योगी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इस समस्या का समाधान तब योगी के पास खुद चलकर आया जब निषाद पार्टी ने बीजेपी में विलय कर लिया।

बीजेपी की एक तलाश ब्राह्मण चेहरे की भी थी जिसे रवि किशन ने पूरी कर दी। गोरखपुर में निषादों के बाद दूसरे पायदन पर अगर कोई वोटर है तो वो ब्राह्मण है। सपा और बीएसपी गठबंधन ने इस बार निषाद समाज से आने वाले रामभुआल निषाद पर दांव लगाया जो अब सीधे बीजेपी के ब्राह्मण उम्मीदवार रवि किशन को टक्कर देने के लिए तैयार हैं।

रविकिशन को गोरखपुर से उतारने के पीछे बीजेपी की रणनीति को देखें तो रवि किशन ब्राह्मण समाज से हैं और भोजपुरी सिनेमा के बड़े स्टार भी है। इस तरह से बीजेपी को दोहरा फायदा है। एक तो ब्राह्मण वोटों का फायदा और दूसरा रविकिशन के सेलेब्रिटी होने का लाभ मिलेगा।

रवि किशन का राजनीतिक करियर बड़ा नहीं है और न ही उनके फिल्मी करियर की तरह चमकदार है। रवि किशन ने 2014 में लोकसभा चुनाव कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन उत्तर प्रदेश की जौनपुर से प्रत्याशी बनाए गए रवि किशन जीत हासिल नहीं कर पाए। वो महज 4 फीसदी वोट अपने नाम कर पाए थे। तब उन्होंने फरवरी 2017 में कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया।

गोरखपुर लोकसभा सीट का जातीय समीकरण कुछ इस तरह है। 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां करीब 19.5 लाख मतदाता हैं। यहां सबसे ज्यादा निषाद समाज के लोग हैं और इस तरह यहां करीब 3 लाख 50 हजार वोटर निषाद समाज के हैं। इसके अलावा दो लाख के करीब ब्राह्मण और 13 फीसदी मुस्लिम मतदाता यहां के उम्मीदवारों की किस्मत तय करते हैं। यहां यादव और दलित वोटर भी है।

रवि किशन के सिनेमा से होकर सियासत में कदम रखने के सफर को देखा जाए तो उन्होंने शुरुआत लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस पार्टी से की। तब अपने गृह जनपद जौनपुर से चुनाव लड़ते हुए हार का सामना किया।

इससे पहले जब उन्हें बॉलीवुड फिल्मों में कामयाबी नहीं मिली तो भोजपुरी फिल्मों में रवि किशन ने अपनी किस्मत चमकानी चाही और यहां वो स्टार एक्टर के तौर पर बनकर उभरे। मौजूदा समय में रवि किशन भोजपुरी सिनेमा के सबसे महंगे एक्टर के रूप में जाने जाते हैं।

लोकसभा चुनाव में स्टार और सुपरस्टार पर दांव लगाने का फैशन पुराना है। इसी फैशन को बरकरार रखते हुए इस बार गोरखपुर सीट पर अपनी साख को बचाने के बीजेपी ने भोजपुरी सिनेमा के स्टार रवि किशन पर विश्वास किया। देखना ये होगा कि बीजेपी की उम्मीदों पर रविकिशन कितना खरा उतरते हैं।

 

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