Wednesday, October 9, 2019

विष्‍णु स्‍मृति श्‍लोक: इन 5 चीजों को हर हाल में माना जाता है पवित्र

हिंदू धर्म में कुछ ऐसी पवित्र और अपवित्र चीजों के बारे में बताया गया है जिसे छूने से व्&#x200dयक्ति अपवित्र हो जाता है।  जैसे जानवर की हड्डियां, पक्षी, कीड़ों के मल, उल्टी आदि चीजों से दूर रहने के लिए कहा जाता है, क्योंकि ये चीजें अपवित्र मानी जाती हैं। मगर ऐसा नहीं हैं विष्&#x200dणु स्&#x200dमृति में एक श्&#x200dलोक में बताया गया है कि कुछ चीजें ऐसी हैं जो हर हाल में पवित्र ही मानी जाती हैं।

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जूठा होकर भी पवित्र

उच्छिष्टं शिवनिर्माल्यं

वमनंशवकर्पटम्।

काकविष्टा ते पञ्चैते

पवित्राति मनोहरा॥

आपको बता दें कि गाय के दूध को पहले उसका बछड़ा पीकर जूठा कर देता है। फिर भी उसे पवित्र ही माना गया है। क्योंकि इसक उपयोग पूजा-पाठ से लेकर यज्ञ और हवन में होता है। इससे भगवान शिव का अभिषेक भी  किया जाता है और भगवान विष्णु का चरणामृत बनता है। आशय है कि गाय धरती और धर्म स्वरूप है और बछिया नंदी और लक्ष्मी स्वरूप इसलिए बछिया के दूध पीने पर भी वह अपवित्र नहीं होता।

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निर्मल है

ऐसी मान्यता है कि गंगा जी का अवतरण स्वर्ग से सीधा भगवान शिवजी के मस्तक पर हुआ। नियमानुसार शिवजी पर चढ़ायी हुई हर चीज ग्रहण नहीं की जाती है। लेकिन गंगाजल फिर भी निर्मल और पवित्र माना जाता है। बता दें कि गंगा तो भगवान विष्णु के चरणों से निकल आयी है इसलिए यह निर्माल्य होकर भी चरणामृत है। श्रीहरि के चरणों से निकलकर आयी और शिवजी ने इन्हें अपने माथे पर बैठाया है। ऐसा माना जाता है कि जो श्रीहरि के चरण लग गया वह तो शिव के लिए भी आदरणीय हो गया।

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अपवित्र होकर भी अमृत तुल्य

मधुमक्खी के शहद को पवित्र माना गया है जब कि फूलों का रस लेकर मधुमक्खी अपने छत्ते पर आती है,तब वो अपने मुख से उस रस की शहद के रूप में उल्टी करती है, जो पवित्र कार्यों में उपयोग किया जाता है। वमन को अपवित्र माना जाता है। लेकिन मधुमक्खी परोपकार में जीती है, वह सृष्टि में फैले अमृत को सहेज कर संसार को देती है। इसलिए शहद को पंचामृत में से एक अमृत मानकर पूजा प्रयोग किया जाता है। इससे भगवान शिव का अभिषेक भी किया जाता है।

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रेशमी वस्त्र

रेशम को बनाने के लिए रेशम के कीडे़ को उबलते पानी में डाला जाता है जिससे उसकी मृत्यु हो जाती है फिर जाकर रेशम प्राप्त होता है। एक तरह से देखा जाए तो यह शव से तैयार होता है। लेकिन कमाल की बात है कि जहां अन्य शवों को अपवित्र माना गया है वहीं रेशम के कीड़े के शव से प्राप्त रेशम को पवित्र माना गया है। बता दें रेशम महर्षि दधिचि के समान है जिन्होंने संसार के कल्याण के लिए अपने प्राण देकर हड्डियों का दान दे दिया जिससे देवताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र तैयार किए गए। इसलिए दधिचि का शव अपवित्र नहीं माना गया, देवताओं ने इन्हें अपने मस्तक से लगाया। इसी प्रकार रेशम भी संसार के कल्याण के लिए अपना प्राणोत्सर्ग कर देता है। इसलिए उससे प्राप्त रेशम भी पवित्र माना गया है।

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काक विष्टा: कौए का मल

बता दें कि कौआ पीपल के पेड़ के फल को खाता है ओर उन पेड़ों के बीज अपनी विष्टा में इधर-उधर छोड़ देता है जिसमें से पेड़ों की उत्पत्ति होती है, आपने देखा होगा की कहीं भी पीपल के पेड़ उगते नहीं हैं बल्कि पीपल काक विष्टा से उगता है,फिर भी पवित्र है।

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