Sunday, November 10, 2019

गुरु शिष्य की इस जोड़ी को राम मंदिर के लिए रखा जाएगा हमेशा याद

अयोध्या में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम फैसला आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ कर दिया है। राम मंदिर पर हर किसी ने अपना-अपना संघर्ष किया है। लालकृषण आडवाणी, संघ, मुरली मनोहर जोशी, विहिप, विहिप प्रमुख दिवंगत Ashok Singhal, सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या, सुब्रमण्यम स्वामी, सैकड़ो कारसेवको का योगदान कोई नहीं भूल सकता।

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बीजेपी और हिन्दू संगठनो के दिग्गज नेताओं ने Ashok Singhal को फैसला आते ही अपने-अपने तरीके से याद किया। सभी का कहना था अशोक सिंघल का योगदान भुलाये नहीं भुलाया जा सकता।

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने अशोक सिंघल को याद किया। कहा, “विजय की इस बेला में हमें श्री अशोक सिंघल को जरूर याद करना चाहिए। मोदी सरकार को फौरन उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करना चाहिए।” स्वामी और सिंघल कई वर्ष तक अयोध्या आंदोलन के लिए साथ काम करते रहे। एक समय अयोध्या विवाद को फैजाबाद के स्थानीय जमीन विवाद के तौर पर देखा जाता था। ये सिंघल ही थे जिन्होंने इसे राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के लिए काफी मेहनत की।

अयोध्या विवाद पर पहली धर्म संसद बुलाने के लिए सिंघल ने तमाम हिंदू संगठनों को एक मंच पर खड़ा किया। सिंघल का 2015 में 89 साल की उम्र में निधन हो गया था। वो मूल रूप से संघ के कार्यकर्ता थे जो बाद में विश्व हिंदू परिषद से जुड़े और इसे एक मजबूत संगठन बनाया। सिंघल इंजीनियर थे और उन्होंने यह पेशा अपनाने के बजाए पूरा जीवन संघ और विहिप को दिया। आपातकाल के दौरान भी उनकी सक्रिय भूमिका थी।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के पूर्व विचारक के एन गोविंदाचार्य से जब पूछा गया कि रामजन्म भूमि आंदोलन की सफलता का श्रेय वह किसे देंगे? गोविंदाचार्य ने कहा, ‘लाखों लोगों ने जिन्होंने बलिदान दिया, आंदोलन के नेतृत्व को और सबसे अधिक इसका श्रेय मैं अशोक सिंघल और लाल कृष्ण आडवाणी को दूंगा.’ सिंघल लंबे समय तक विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष थे और भाजपा के आंदोलन में शामिल होने से पहले उन्होंने ही इसे व्यापक रूप दिया।

बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण सिंघल को विहिप से अपना स्थान छोड़ना पड़ा और प्रवीण तोगड़िया ने उनका स्थान लिया। आज वि॰हि॰प॰ की जो वैश्विक ख्याति है, उसमें अशोक सिंघल का योगदान सर्वाधिक है। अशोक सिंघल परिषद के काम के विस्तार के लिए विदेश प्रवास पर भी जाते रहे। वे आजीवन अविवाहित रहे।

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यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के राम मंदिर को लेकर किये गए संघर्ष को भी नहीं भुलाया जा सकता। केशव प्रसाद मौर्या राम मंदिर मुद्दे से शुरू से ही जुड़े हुए रहे हैं। केशव प्रसाद मौर्या को समय-समय पर अहम जिम्मेदारी मिलती रही है, केशव पर राम मंदिर आंदोलन में कारसेवको तक भोजन पहुँचाने की अहम जिम्मेदारी थी। केशव प्रसाद मौर्या ही थे जिनके कहने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को आत्मरक्षा के लिए गदा दी गई थी। केशव प्रसाद मौर्या रामभक्त सम्मलेन में नजरबन्द भी रह चुके हैं। बता दें केशव और अशोक सिंघल में गुरु-शिष्य जैसा रिश्ता था।

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