Saturday, November 23, 2019

जानिए कौन है अजित पवार जिसने रातों-रात महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला दिया…!

महाराष्ट्र में सीएम पद की शपथ ग्रहण के बाद देवेंद्र फडणवीस ने सबसे पहले एनसीपी प्रमुख के भजीते अजित पवार का आभार जताया। बारामती से विधायक अजित को महाराष्ट्र की नई सरकार में डिप्टी सीएम बनाया गया हैं। वहीं रातभर में पलटी इस बाजी में इनका किरदार सबसे अहम माना जा रहा है। अपने चाचा शरद पवार के नक्शेकदम पर चलते हुए अजित पवार ने राजनीति में एंट्री की थी और 1990 से अब तक सात बार वह बारामती के विधायक निर्वाचित हो चुके हैं।

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आइए डालते है- उनके राजनीतिक सफर पर एक नजर

आपको बता दें कि 22 जुलाई 1959 को अजित पवार का जन्म अहमदनगर में उनके दादा के यहां हुआ था। वह शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। अजित पवार ने 1982 में राजनीति में प्रवेश किया और कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री (Cooperative Sugar Factory) के बोर्ड में चुने हुए। वह पुणे जिला कोऑपरेटिव बैंक (Cooperative Bank) के चेयरमैन भी रहे और 16 साल तक इसी पद रहे। इसी दौरान वह बारामती से लोकसभा सांसद भी निर्वाचित हुए। वहीं बाद में उन्होंने शरद पवार के लिए यह सीट खाली कर दी थी।

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बारामती से सात बार रह चुके है विधायक-

बता दें कि बारामती सीट पवार की खानदानी सीट है। इस सीट परएनसीपी प्रमुख शरद पवार और अजित पवार का ही बोलबाला रहा। 1967 से 1990 तक शरद पवार यहां से विधायक रहे। इसके बाद 1991 से अब तक सात बार अजित पवार यहां से विधायक चुने गए। वहीं दोनों ने मिलाकर आठ बार कांग्रेस और चार बार एनसीपी के झंडे से जीत हासिल की। शिवसेना या भाजपा से कभी कोई इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर सका।

पहले भी रह चुके हैं डिप्टी सीएम-

महाराष्ट्र में 2010 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में वह पहली बार उप मुख्यमंत्री चुने गए। अपने चाहने वालों और जनता के बीच वह दादा के रूप में लोकप्रिय हैं। सितंबर 2012 में एक घोटाले के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा हालांकि एनसीपी ने एक श्वेत पत्र जारी करते हुए अजित पवार को क्लीन चिट दे दी थी और उप मुख्यमंत्री कार्यकाल जारी किया।

अपने विवादित बयानों से रहे सुर्ख़ियों में-

बता दें कि अजित पवार महाराष्ट्र में 1500 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के मामले में आरोपी भी हैं। अजित पवार कई बार अपने विवादित बयानों को लेकर भी चर्चा में रह चुके हैं। वहीं 7 अप्रैल 2013 अजित पवार ने सूखे के संकट पर 55 दिन तक उपवास करने वाले कार्यकर्ता को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि, अगर बांध में पानी नहीं है.. तो क्या हमें वहां पेशाब करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसके लिए माफी मांगी और इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती बताया था।

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चुनाव प्रचार पर लगाई थी रोक-

16 अप्रैल 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान बारामती निर्वाचन क्षेत्र से अपनी चचेरी बहन सुप्रिया सुले के लिए प्रचार करने के लिए वह एक गांव के दौरे पर गए थे। यहां उन्होंने ग्रामीणों को धमकाते हुए कहा कि अगर सुले को वोट नहीं किया तो वह गांव में पानी की सप्लाइ काटकर इसकी सजा देंगे। बता दें कि पवार पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगा और उन्हें चुनाव प्रचार पर 48 घंटे की रोक लगा दी थी।

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