Sunday, November 24, 2019

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और वाम मोर्चा के वरिष्ठ नेता क्षिति गोस्वामी का निधन

कोलकाता : रेवलूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के महासचिव और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री क्षिति गोस्वामी का चेन्नै के एक निजी अस्पताल में उम्र संबंधी बीमारियों की वजह से रविवार सुबह निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 77 साल के थे और उनके परिवार में उनकी पत्नी और बेटी हैं।
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उम्र संबंधी बीमारियों के अलावा गोस्वामी फेफड़े के संक्रमण से पीड़ित थे और उन्हें इसी को लेकर चेन्नै के अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर शाम को कोलकाता लाया जाएगा और सोमवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सभी दलों के नेताओं ने रविवार को गोस्वामी के निधन पर शोक व्यक्त किया।

ममता ने जताया गोस्वामी के निधन पर दुख
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनका निधन भारतीय राजनीति के लिए बहुत बड़ी क्षति है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में बनर्जी ने कहा, ‘मैं क्षिति गोस्वामी के आकस्मिक निधन से बहुत दुखी हूं। उनका आज सुबह चेन्नै में निधन हो गया। यह भारतीय राजनीति के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।’ पश्चिम बंगाल वाम मोर्चा के अध्यक्ष और सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य बिमान बोस ने भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि गोस्वामी की मौत से राज्य के राजनीतिक जगत में शून्य पैदा हो गया है। चौधरी ने कहा, ‘वह एक ईमानदार नेता थे। उनकी बहुत याद आएगी।’

पिछले साल ही बने थे पार्टी के महासचिव
आपको बता दें कि गोस्वामी 80 दशक के उत्तरार्द्ध से लेकर 2011 तक यानी दो दशक तक पीडब्ल्यूडी मंत्री रहे। वह 2012 से कुछ वर्षों तक आरएसपी के राज्य सचिव भी रहे। गोस्वामी को पिछले साल पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव चुना गया था। साठ के दशक की शुरुआत में राजनीति में कदम रखते हुए, वे आरएसपी की छात्र शाखा ‘अखिल भारतीय प्रगतिशील छात्र संघ’ के राज्य सचिव भी बने थे।

लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन का किया था विरोध
वाम मोर्चा के एक महत्वपूर्ण सदस्य रहे गोस्वामी पार्टी की कुछ नीतियों को लेकर राज्य की तत्कालीन व्यवस्था की आलोचना करने से भी कभी कतराते नहीं थे, चाहे वह सिंगूर में भूमि अधिग्रहण का मामला हो या नंदीग्राम का मामला हो। दिग्गज नेता ने 2016 के विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन का विरोध करते हुए कहा था कि यह इस मोर्चा और इसके घटक दलों के लिए विनाशकारी होगा।

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