Sunday, November 3, 2019

सीएम योगी को बर्दाश्त नहीं भ्रष्टाचार,पेश की नई मिसाल

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिजली कर्मचारियों के GPF और CPF की धनराशि एक असुरक्षित निजी संस्था DHFL में जमा करने के मामले की जांच CBI से कराने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने शनिवार रात कहा कि जब तक CBI यह जांच अपने हाथ में नहीं ले लेती, तब तक पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के डीजी इसकी जांच करेंगे। यह जानकारी अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने दी। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भी सीएम योगी को पत्र लिखकर इस मामले की सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया था। इस बीच, पीएफ के 23 अरब रुपये DHFL में फंसाने वाले दो अधिकारियों को गिफ्तार कर लिया गया है।

यूपी पावर कारपोरेशन के एक लाख से अधिक कर्मचारियों की सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ)और अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) के 2267.90 करोड़ रुपये दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में फंस गए हैं। कर्मचारियों ने यह मुद्दा उठाया तो सरकार ने तत्काल प्रभाव से शनिवार को कई कार्रवाइयां कीं। सीएम योगी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसके लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की जांच शुरू करा दी गई है। सूत्रों के मुताबिक पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक का घोटाला सामने आने के बाद यह बात खुली की इस बैंक से डीएचएफएल का भी जुड़ाव रहा है। मुंबई हाईकोर्ट ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक के साथ ही डीएचएफएल के भुगतान पर रोक लगा दी है। ये बातें सामने आने के बाद कारपोरेशन हरकत में आया।

बीते 10 अक्तूबर को कारपोरेशन ने पावर सेक्टर इंप्लाइज ट्रस्ट के सचिव व कारपोरेशन के महाप्रबंधक वित्त प्रवीण कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया था। विभागीय कार्यवाही भी जा रही है। शनिवार को सरकार ने इस मामले में प्राथिमकी दर्ज कराई, जिसके बाद प्रवीण कुमार गुप्ता के साथ ही सुधांशु द्विवेदी को पुलिस ने तुरंत गिरफ्तार कर लिया।

ं : अखिलेश और अजित सिंह जो सोच न सके वो सीएम योगी ने किया- डॉ. चंद्रमोहन

 


बता दें नियम विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के पैसे को डीएचएफएल में निवेश किया गया था। गैर सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में निवेश के लिए संबंधित ट्रस्टों को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने किसी ने किसी को भी अधिकृत नहीं किया था। इस निवेश के लिए उच्च प्रबंधन का कोई अनुमोदन भी नहीं लिया गया था। गाइडलाइन के अनुसार सिक्योरिटीज में ही निवेश करने का प्रावधान है जबकि डीएचएफएल में फिक्सड डिपाजिट किया गया था। मार्च 2017 से दिसंबर 2018 के बीच डीएचएफएल में सामान्य भविष्य निधि से 2631.20 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसमें 1185.50 करोड़ ट्रस्ट कार्यालय प्राप्त कर चुका है। इस मद में 1445.70 करोड़ फंस गए हैं। इसी प्रकार कार्मिकों के अशंदायी भविष्य निधि से 1491.50 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसमें 669.30 करोड़ ट्रस्ट को वापस हो चुका है। इस मद से 822.20 करोड़ रुपये फंस गए हैं।

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