Sunday, November 25, 2018

अच्छी खबर : भीड़ बढ़ते ही उड़ाकर सामान पहुंचाएगा ड्रोन वाहन, सरकार की तरफ से मिली हरी झंडी

नई दिल्ली : जल्द ही सड़कों के ऊपर ड्रोन उड़ता हुआ दिखायी देगा। जी हां योजना पर काम सूचारू रूप से जारी रहा तो कुछ समय बाद ड्रोन का इस्तेमाल टैक्सियों और सामान की डिलीवरी गाड़ी के रूप किया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ड्रोन को व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल करने, मंत्रालय ड्रोन के कमर्शियल उपयोग को टैक्सियों और डिलीवरी गाड़ी के रूप में इस्तेमाल में लाने को तैयार हो गयी है।

नागर विमानन मंत्री जयंत सिन्हा ने इस बारे में कहा कि “हम 1 दिसंबर को पूरे ड्रोन उद्योग को लांच करने के लिए काम कर रहे हैं। ड्रोन पूरे अनुप्रयोगों की मेजबानी करेगा, जिनमें से कई पहले ही दुनिया भर में उपयोग किए जा रहे हैं इसलिए वे भारत में उपलब्ध कराये जाएंगे। हमारे पास ड्रोन टास्क फोर्स भी है जो ड्रोन 2.0 नियमों पर काम कर रहा है, जो हमें लगता है कि भारत में इसे लागू करने के बाद वास्तव में यह  क्रांतिकारी होगा। और हम अगले कुछ महीनों में इसे लागू करने की उम्मीद कर रहे हैं।”

लॉ फर्म खेतान कंपनी के पार्टनर रविंद्र झुनझुनवाला का कहना है कि ड्रोन 2.0 सरकार कि एक दूरंदेशी सोच है। उन्होंने कहा कि “ड्रोन 2.0 सरकार कि एक दूरंदेशी सोच वाला कदम है, जो पुरे डिलीवरी प्रणाली को बदल के रख देगा। 1 दिसंबर से, फोटोग्राफी और मनोरंजन के प्रयोजन हेतु ड्रोन के इस्तेमाल के लिए ऑपरेटरों को डिजिटल स्काई प्लेटफार्म के जरिये आवेदन करने की अनुमति होगी।”

सिन्हा ने जानकारी देते हुए कहा कि “ड्रोन 2.0 नियम कोड को तोड़ेगा और हम एक ही समय में तीन महत्वपूर्ण द्वार पार करने में सक्षम होंगे। पहला दृष्टि की दृश्य रेखा से परे, दूसरा पेलोड, तीसरा स्वचालन। हम एक रास्ता खोजने की कोशिश कर रहे हैं जिससे हम ड्रोन को स्वचालित रूप से संचालित करने में सक्षम हो सकें।”

उन्होंने कहा कि “यह भारत को ड्रोन व्यवस्थापन में विश्व लीडर बना देगा। भारत के बड़े बाजारों के कारण, हम ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र में भी लीडर बनेंगे क्योंकि इसमें विनिर्माण शामिल है  इसमें सॉफ्टवेयर विकास और अनुप्रयोग भी शामिल हैं। जहां तक ड्रोन पारिस्थितिक तंत्र का संबंध है, हमारे प्रयासों के लिए ध्यान केंद्रित है।”

मंत्रालय का कहना है कि डिजिटल स्काई प्लेटफार्म दूरस्थ रूप से पहला राष्ट्रीय मानव रहित यातायात प्रबंधन (यूटीएम) पोर्टल होगा। ये पोर्टल पायलट एयरक्राफ्ट सिस्टम (आरपीएएस) के लिए नीतियों को लागू करेगी। जिसके तहत ‘कोई अनुमति नहीं, कोई टेक-ऑफ नहीं’ (एनपीएनटी) नीति लागू की जाएगी जो ‘नैनो’ आकार के नहीं हैं।

वजन में ड्रोन की 5 श्रेणियां नैनो, सूक्ष्म, छोटा, मध्यम और बड़ा हैं। नियंत्रित हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने के लिए, एक उड़ान योजना की फाइलिंग और एयर डिफेंस क्लीयरेंस (एडीसी) / फ्लाइट इन्फॉर्मेशन सेंटर (एफआईसी) नंबर पाना बेहद जरूरी है।

ये हैं “नो-ड्रोन जोन”

  • अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास
  • नई दिल्ली में विजय चौक
  • नई दिल्ली के राज्य सचिवालय परिसरों के पास
  • सामरिक जगहों और महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों के पास
  • हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्रे

“नो-ड्रोन जोन” वाले इन क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने के लिए भारतीय दंड संहिता के तहत केस दर्ज करने का प्रावधान है।

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