Saturday, December 8, 2018

एग्जिट पोल में जीत के बाद भी राजस्थान में कांग्रेस के लिए यह है बड़ा “सिरदर्द”

मध्य प्रदेश, राजजगह, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग का दौर खत्म हो चुका है और अब प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद है. मगर परिणाम से पहले टीवी चैनलों के एग्जिट पोल ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि किस राज्य में कौन सी पार्टी बहुमत में आएगी और कौन सी पार्टी सत्ता से बेदखल होगी.

नई दिल्ली: भले ही शुक्रवार को जारी एग्जिट पोल के मुताबिक राजजगह कांग्रेस की सरकार बनती दिख रही है, मगर कांग्रेस के भीतर असल माथा-पच्ची अब शुरू होने वाली है. 11 दिसंबर के परिणाम में अगर एग्जिट पोल के नतीजे सही साबित होते हैं तो राजजगह में कांग्रेस का राजतिलक तो होगा, मगर मुख्यमंत्री का ताज किसके सिर पर होगा, यह अभी भी बड़ा सवाल है और इस सवाल पर अब तक कोई खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है. हालांकि, यह बात तय है कि अशोक गहलोत या फिर सचिन पायलट में से ही कोई एक राजजगह में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पोस्ट का दावेदार होगा. साथ ही जब तक नतीजों की घोषणा नहीं हो जाती, कांग्रेस पार्टी यह फैसला सुरक्षित रखना चाहती है.

दरअसल, पिछले महीने चुनावी समीकरणों को साधने के लिए कांग्रेस ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट में से किसी एक को चुनाव से पहले सीएम फेस के रूप में चुनने से इनकार कर दिया था. यहां तक की 67 वर्षीय अशोक गहलोत भी एक टीवी चेनल के इस सवाल का जवाब देने से बचे. जब पूछा गया कि आखिर राजजगह में कांग्रेस का दूल्हा कौन होगा? इस पर दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत ने कहा कि इस सवाल से मुझे हर दिन सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से पार्टी ने कभी राज्य में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है.

अशोक गहलोत ने कहा कि मेरी कोई प्राथमिकता नहीं है. अगर मुझे पार्टी दिल्ली में काम करने को बोलेगी तो मैं दिल्ली में काम करूंगा और राजजगह में कहेगी तो मैं राजजगह में ही काम करूंगा. उन्होंने कहा कि हाई कमांड ही है जो काम का निर्धारण करेगी. मेरे लिए कोई पोस्ट की कोई प्रायोरिटी नहीं है. मेरा मानना है कि किसी के लिए भी प्रायोरिटी नहीं होनी चाहिए. पार्टी जो बोले वही करना चाहिए.

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि 41 वर्षीय सचिन पायलट, जो राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं, एक अच्छा मुख्यमंत्री हो सकते हैं या फिर कुछ और अनुभव की आवश्यकता होगी, इस सवाल पर अशोक गहलोत ने काफी नापतौल कर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि यह एक हाईपोथेटिकल सवाल है. मैं किसी की क्षमताओं पर कोई प्रश्न चिह्न नहीं लगाऊंगा. आपको मुझसे यह नहीं पूछना चाहिए.

यह पूछ जाने पर कि वह राजजगह में काम करना पसंद करेंगे या फिर नेशनल पॉलिटिक्स में, इस सवाल पर अशोक गहलोत ने कहा कि जो पार्टी कहेगी, वही करना मेरा कर्तव्य होगा. मैं दस साल तक मुख्यमंत्री भी रहा, तीन बार केंद्रीय मंत्री भी रहा, मैंने कभी किसी चीज के लिए नहीं कहा. पार्टी ने मुझे सब कुछ दिया. फिर यह सवाल अभी क्यों?

 

 

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