Friday, December 7, 2018

क्या ईरान से अपनी करेंसी में व्यापार करना डॉलर की निर्भरता को कम करनें की ओर एक महत्वपुर्ण कदम है?

क्या ईरान से अपनी करेंसी में व्यापार करना डॉलर की निर्भरता को कम करनें की ओर एक महत्वपुर्ण कदम है?

अमेरिका नें कुछ महीनों पहले ही ईरान पर भारी प्रतिबंध लगाते हुए सभी देशों को ईरान से व्यापार करने से इंकार कर दिया था और यह चेतावनी भी दी थी की अगर कोई भी देश ईरान से व्यापार करता है तो उसें बुरे परिणामों से भुगतना पड़ सकता है।लेकिन इस चेतावनी के बाद भी कुछ देशों नें ईरान के साथ व्यापार जारी रखा है जिसमें जल्द ही भारत का भी नाम जुड़नें वाला है क्योंकि भारत और ईरान नें अभी हाल ही में अमेरिकी डॉलर के बगैर व्यापार करनें की एक तरकीब निकाली है जिसकें द्वारा भारत और ईरान दोनों को फायदा हो सकता है।

दरअसल भारत और ईरान जल्द ही एक समझौता करनें वाले है जिसके तहत दोनों देशों के बीच व्यापार डॉलर में नहीं बल्कि अपनें देश की करेंसी रुपया और रियाल में करेंगे जिसका मतलब है कि अब भारत तेल को खरीदनें के लिए रुपयें में पेंमेंट करेंगा जो हमारे देश के लिए बेहद ही अच्छी खबर है क्योंकि इससें हमारे देश की मुद्रा की मांग अंतराष्ट्रीय बाज़ार में बढेगी और डॉलर पर हमारी निर्भरता भी कम होगी और जिसके कारण लगातार गिरतें रुपयें में कुछ रुकावट आएगी।

ईरान से तेल आयात कम करने और भुगतान रोकने के बाद भारत को छूट मिली हुई है। 180 दिनों की मिली छूट के दौरान भारत प्रतिदिन ज्यादा से ज्यादा 3 लाख बैरल्स क्रूड ऑइल का आयात कर सकता है। हालांकि इस साल भारत ने औसतन करीब 5.6 लाख बैरल्स प्रतिदिन तेल का आयात किया है। आपको बता दें कि चीन के बाद ईरानी तेल  का भारत दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। और अमेरिकी प्रतिबंध को चीन नें भी मानने से इंकार कर दिया है।और लगता है कि अब वह भी डॉलर में आयात बंद कर देगा जिससें अमेरिकी डॉलर को एक और बड़ा झटका लगा सकता है।

इन सब बदलावों से यह लगा रहा है कि डॉलर की वैल्यू धीरे धीरे कम होती जा रही है और ईरान से पहले रूस भी भारत को अपनी करेंसी में व्यापार करनें का प्रस्ताव दे चुका है और अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो भारत रुस से भी अपनी करेंसी में व्यापार कर सकेगा और डॉलर को इससे भारी नुकसान होगा और भारतीय करेंसी को फायदा और इससे पूरे विश्व में डॉलर को सबसे मजबूत मानें जाना और व्यापार की सबसे सटीक करेंसी मानें जानें पर भी सवाल खड़े हो सकते है।

अगर हम भारत की बात करें तो अभी भारत अपना सबसे ज्यादा व्यापार डॉलर मे ही करता है और वैसे तो सिर्फ ईरान से अपनी करेंसी में व्यापार करनें से ज्यादा फर्क तो नहीं पड़ेगा लेकिन भारत की डॉलर पर इस निर्भरता को कम करने के लिए यह एक महत्वपुर्ण कदम है।

 

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