Monday, January 14, 2019

देखें, मकर संक्रांति विशेष..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

आप सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ। इस वर्ष मकर संक्रांति १४ जनवरी सायंकाल में प्रवेश कर रहा है और १५ जनवरी को मनाया जायेगा। मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है इसपर एक लेख पिछले वर्ष इसी दिन धर्मसंसार पर प्रकाशित किया गया था जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। इस वर्ष पंडित रोहित वशिष्ठ ने मकर संक्रांति के विषय में कुछ ज्ञानवर्धक जानकारी हमें भेजी है:

मुहूर्त

इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश १४ जनवरी २०१९ को रात्रि ७:५० मिनट पर हो रहा है। स्नान दान आदि के लिए मकर सक्रांति का समय १५ जनवरी २०१९ को प्रातः ७:१९ से आरंभ हो रहा है। पुण्य काल १५ जनवरी २०१९ को प्रातः ७:१९ से आरंभ होकर १२:३० तक रहेगा। महापुण्य काल १५ जनवरी २०१९ को प्रातः ७:१९ से प्रातः ९:०३ तक है।

मकर संक्रांति क्यों मानते है:

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को मकर सक्रांति कहते हैं। इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। उत्तरायण की अवधि देवताओं का दिन है और दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि कहा जाता हैं। अतःमकर सक्रांति देवताओं का प्रभात काल है। इसके विषय में कहा गया है &#8211 माघ मकरगत रवि जब होई। तीरथपतिहि आव सब कोई।। माघ मास में मकर सक्रांति के दिन ही समस्त देवी देवता तीर्थराज प्रयाग में आकर स्नान करते हैं अतः तीर्थराज प्रयाग में स्नान का अत्यधिक शुभ फल प्राप्त होता है। मकर सक्रांति के दिन गंगा महारानी भगीरथ जी की तपस्या का फल प्रदान करने के लिए भगीरथ जी के पीछे पीछे चल कर गंगासागर नामक जगह पर कपिल मुनि के आश्रम में पहुंचकर सागर में मिल गई थी। मकर संक्रांति को ही महाराजा सगर के ६०००० पुत्रों को मुक्ति प्राप्त हुई थी अतः गंगासागर भी स्नान करने का बड़ा महत्व है। मकर सक्रांति को ही कंस ने लोहिता नाम की राक्षसी को श्रीकृष्ण को मारने के लिए गोकुल भेजा। भगवान श्री कृष्ण ने खेल खेल में ही उस लोहिता नाम की राक्षसी को मार दिया।

इस दिन क्या करना चाहिए:

मकर सक्रांति को ब्रह्म मुहूर्त में जागकर सूर्योदय से पूर्व ही स्नान कर लेना चाहिए। इस दिन किए गए स्नान दान जप हवन अनुष्ठान आदि का १०० गुणा अधिक फल प्राप्त होता है। मकर सक्रांति के लिए विशेष रूप से गंगा जी का तट, प्रयागराज एवं गंगासागर यह तीन जगह विशेष महत्वपूर्ण है। इन तीनों जगहों में से किसी एक जगह पर जाकर स्नान दान आदि का विशेष फल होता है। यदि तीर्थ में जाना संभव न हो तो अपने घर पर भी इन तीनों जगहों का स्मरण करते हुए स्नान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। यदि घर पर ही स्नान कर रहे हैं तो एक लोटे में पहले थोड़ा गंगाजल व तिल डालें। फिर उस लोटे को शुद्ध जल से भर कर लोटे को दाहिने हाथ से ढककर गंगा यमुना गोदावरी सरस्वती नर्मदा सिंधु कावेरी आदि नदियों का आवाहन करें। नदियों के आवाहन करके उस जल से स्नान करें। स्नान करने के पश्चात धुले हुए वस्त्र पहनकर पूजा घर में आकर के श्रीगणेश, श्री सूर्य देव , श्री विष्णु जी, श्री शिव जी एवं भगवती दुर्गा को प्रणाम कर नवग्रह को प्रणाम करें। उसके पश्चात सूर्य नारायण को अर्घ्य प्रदान करें। सूर्य नारायण को चढ़ाए जाने वाले जल में लाल सिंदूर, लाल फूल, साबुत चावल एवं थोड़ा गुड डालकर सूर्य नारायण को &#8220ओम घृणि सूर्याय नमः&#8221 इस मंत्र से तीन बार अर्घ्य प्रदान करें।

क्या दान करें:

मकर सक्रांति के दिन सूर्य तिल तिल आगे बढ़ता है इसलिए मकर सक्रांति को तिल दान का महत्व है। मकर संक्रांति के दिन तांबे की सूर्य नारायण की प्रतिमा बनाकर उस प्रतिमा को सवा किलो देसी घी से स्नान कराएं और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। उसके पश्चात सूर्य मूर्ति एवं देशी घी किसी ब्राह्मण को दान कर दें। ऐसा करने से पाप एवं निर्धनता दूर होती हैं, धन एवं यश की प्राप्ति होती है। सायं काल शिव मंदिर में जाकर सवा किलो देसी घी एवं एक ऐसा कंबल, जिसका रंग काला न हो, भगवान शिव के सम्मुख रखकर भगवान शिव को प्रणाम करें और वह कंबल और देसी घी मंदिर के पुजारी को दान करें। ऐसा करने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और धन की प्राप्ति होती है। यशोदा जी एवं श्री कृष्ण एक ऐसी फोटो जिसमें माँ यशोदा दही मंथन कर रही हो और श्रीकृष्ण माँ के पास हो, किसी योग्य ब्राह्मण को बुलाकर उनके द्वारा माँ यशोदा व श्री कृष्ण की पूजा करके, मथानी दही और पात्र की पूजा करके दक्षिणा सहित यह सब सामान उस ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से निश्चित संतान की प्राप्ति होती है। मकर सक्रांति के दिन दोपहर के समय अपने पितरों के निमित्त भी अन्न दान या श्राद्ध करना चाहिए। ऐसा करने से पितरों की तृप्ति होती है और पित्र दोष से राहत मिलती है। इस दिन खिचड़ी एवं तिल का दान करना चाहिए और भोजन में के रूप में तिल मिश्रित खिचड़ी ही खानी चाहिए। निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

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