Thursday, February 14, 2019

मधुबाला बर्थडे स्पेशल : 66 फिल्मों में काम करने के बाद भी कभी पूरी नहीं हुई मधुबाला की ये एक इच्छा

बॉलीवुड इंडस्ट्री की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री शुमार मधुवाला का आज जन्मदिन है. 14 फरवरी वैलेंटाइन डे के मौके पर इनका जन्म हुआ, जो खूबसूरत होने के साथ-साथ बेहद रोमांटिक भी थीं. इनका दिल बेहद मासूम था और हर किसी पर आ जाता था. हमेशा से इनकी खूबसूरती की तुलना हॉलीवुड एक्ट्रेस मर्लिन मुनरो से की जाती है. अगर बात करें इनके करियर की तो इन्होंने मुग्ल-ए-आजम, चलती का नाम गाड़ी जैसी कई सुपर-डुपर हिट फिल्मों में काम किया है. इन्होंने अपने करियर में 66 फिल्मों में काम किया है, लेकिन इन फिल्मों काम करने के बाद भी मधुबाला की एक खास फिल्म में काम करने की इच्छा कभी पूरी नहीं हो पाई.

आपको बता दें कि फिल्म रोटी कपड़ा और मकान के डायरेक्टर बिमल रॉय की फिल्म बिराज बहू में मधुबाला काम करने इच्छा को पूरा नहीं कर सकीं. इन्होंने कई बार इस फिल्म को लेकर डायरेक्टर बिमल रॉय के ऑफिस के कई चक्कर भी लगाए थे, लेकिन की वजह के चलते बिमल रॉय उन्हें कास्ट नहीं कर पाए. जिसके चलते मधुबाला को अपने आखिरी समय तक इस बात का अफसोस रहा था. वहीं साल 1954 में फिल्म बिराज बहू रिलीज हुई थी, जिसमें कामिनी कौशल ने काम किया था. बता दें कि ये फिल्म शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की बंगाली उपन्यास पर आधारित थी.

वीनस ऑफ इंडियन सिनेमा

मधुबाला को इनकी खूबसूरत के चलते ‘वीनस ऑफ इंडियन सिनेमा’ कहा जाता है. इन्होंने 40 और 50 के दशक में देव आनंद, दिलीप कुमार, राज कपूर और किशोर कुमार के साथ-साथ कई अभिनेताओं के साथ कई फिल्मों में काम किया था. वहीं दिलीप कुमार और मधुबाला की जोड़ी को ऑनस्क्रीन के साथ-साथ ऑफस्क्रीन में भी काफी पसंद किया गया था, जिसके बाद दिलीप कुमार ने मधुबाला से शादी तक करने का फैसला किया लेकिन ऐसा कहा जाता है कि पिता की वजह से दोनों शादी नहीं कर सके और फिर मधुबाला की शादी किशोर कुमार से हुई. जिसके बाद से वो भेहद बीमार रहने लगीं.

आपको बता दें कि मधुबाला 11 भाई-बहनों में कामने वाली अकली सदस्य थी. इनके पिता लाहौर में स्थित एक इंपीरियल टोबैको कंपनी में काम किया करते थे. वहीं  नौकरी चले जाने के बाद वो लाहौर से दिल्ली आ गए थे. जिसके बाद वो दिल्ली से मुंबई आए.

मधुबाला ने 6 साल की उम्र में ही फिल्मी दुनिया में अपनी कदम रखा था. वहीं बचपन से ही दिल में छेद होने की वजह से आगे जाकर उन्हें एक गंभीर बीमारी होती गई. जिसके चलते इनका जीवन आखिरी 9 साल तक बहुत एकांत में गुजरा था और इनहोंने 23 फरवरी 1969 को दुनिया को अलविदा कह दिया था.

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