Monday, April 15, 2019

देखें ,नम आखों से 66 शहीद दमकलकर्मियों को किया गया याद!..

आज एक बार फिर मै खान पान से जुडी कुछ जरुरी बातों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

लखनऊ। वर्ष 1944 को मुम्बई के बंदरगाह पर मालवाहक जहाज में लगी आग को बुझाते हुए 66 दमकल कर्मियों की मौत के बाद हर पूरे देश में 14 अप्रैल को अग्निशमन सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। रविवार की सुबह 8 बजे हजरतगंज के फायर स्टेशन पर दमकल विभाग के अधिकारियों ने शहीद दमकल कर्मियों को श्रृद्घांजली दी। इसके बाद 11.30 बजे राज्यपाल ने अपने आवास से अग्निशम रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।


इस रैली में शामिल दमकल की 7 गाडिय़ां शहर के कई इलाके से गुजरी और लोगों को आग से लडऩे के बारे में जागरूक किया। 14 अप्रैल को अग्निशमन दिवस के मौके पर रविवार को हजरतगंज फायर स्टेशन पर डीजी फायर विश्वजीज महापात्रा , आईपी एन रवीन्द्र, सीएफओ विजय कुमार सिंह के सहित कई पुलिस के अधिकारियों ने शहीद हुए दमकल कर्मियों को श्रृद्घांजली दी। इसके बाद दमकल के अधिकारियों ने राज्यपाल, प्रमुख सचिव गृह,डीजीपी को फ्लैग लगाया।

सुबह 11.30 बजे दकमल विभाग के अधिकारियों ने राज्यपाल फ्लैग लगाया। इसके बाद राज्यपाल ने दमकल की एक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रैली में दमकल विभाग बुलेट मोटरसाइकिल, वाटर मिस्ट मिनी वाटर टण्ेडर वाटर टेण्डर,, हाइड्रालिक प्लेटफार्म, टाटा, टेल्को और सहारा जैसे संस्थानाओं की दमकल गाडिय़ां मौजूद रहीं। यह रैली राजभवन, बंदरियाबाग, फन सिनेमा गोमतीनगर, पालीटेक्निक चौराहा, इन्दिरानगर, एचएएल, महानगर, कपूरथला, आईटी चौराहा, डालीगंज, बासमण्डी, सिटी स्टेशन, गोलागंज, कैसरबाग, नूर मंजिल, बार्लिंग्टन चौराहे होते हुए विधान सभा पर समाप्त हुई।

अग्निशमन दिवस के दिन से ही एक सप्ताह के लिए अग्निशम सप्ताह भी मनाया जाता है। इस सप्ताह के दौरान दमकल विभाग लोगों को आग से बचने और उसका सामान करने के लिए कई कार्यक्रम करता है। इस बार अग्नि सुरक्षा सप्ताह की थीम आग बुझाने से बेहतर आग की रोकथाम रखा गया है।
2054 लोगों को पिछले वर्ष

बचायी गयी जान
पूरे प्रदेश भर के 75 जनपदों में पहले 286 अग्निशमन केन्द्र थे। पिछले साल 57 केन्द्र और खोले गये और इस तरह मौजूदा समय में 343 अग्निशमन केन्द्र लोगों की सेवा में कार्यरत हैं। पिछले वर्ष दमकल कर्मियों ने 2054 पुरूषों, 7136 पशुओं और लगभग 2.81 करोड़ की सम्पत्ति को जलने से बचाया गया था।

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