Wednesday, April 17, 2019

देखें ,सेना के नाम पर वोट मांगने वालों ने कारगिल शहीद के परिजनों का कभी नहीं दिया ध्यान!..

आज एक बार फिर मै खान पान से जुडी कुछ जरुरी बातों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में होने वाली अपनी लगभग सभी जनसभाओं में पीएम नरेन्द्र मोदी अक्सर सेना के नाम पर वोट मांगते हुए दिख जाते है। हालाकि उनके दिल में देश की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों के परिजनों का ख्याल कभी भी नहीं आया। उन्होने पुलवामा में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों का नाम तो कई बाद लिया, लेकिन कारगिर में लड़ते हुए अपनी जान गंवाने वाों का कभी भी नाम नहीं लिया।

बता दें कि इस जग में शहीद हुए करीब 80 जवानों के परिजनों का का पूरा ध्यान रखते हुए उनके बच्चों की पढ़ाई का पूरा जिम्मा ले रखा है। उन्होने जंग के दौरान वहां के हालातों के बारे में बताते हुए कहा कि तोलोलिंग पहाड़ी पर जंग जारी थी, इसकी पथरीली पहाड़ियों के चलते वहां आधे से ज्यादा मौतें हुई थी।

उन्होने बताया कि 18 ग्रिनेडियर और 16 ग्रिनेडियर बटालियनो के कई जवान शहीद हो गए थे। जिसके चलते कुपवाड़ा से एक नई बटालियन 2nd राजपूताना राईफल्स को 24 घंटे के अंदर गुमरी में रिपोर्ट करने को कहा गया। बटालियन को लाँच करने प्लानिंग उनके कमांडिंग आफिसर Colonel- M.B.Ravindranath ने की थी। उनहोने बटालियन के चुनिंदा 80 ऐथेलीटों और आफिसर्स की चार टीमें बनाकर उन्हे युद्ध के लिए तैयार किया, वास्तव में ये एक आत्मघाती मिशन था। रविन्द्रनाथ ने असाल्ट टीम को इतना ज्यादा Emotionally charged कर दिया कि सूबेदार भंवर लाल भाखर पेप_टाॅक के बीच में ही बोल पड़ा सर ! आप सुबह तोलोलिंग टाॅप पर आना, वही मिलेंगें।

बाद में घमासान और खूनी संघर्ष के बाद सेकेंड बटालियन द राजपूताना राईफल्स ने ऊँची चोटी पर बैठे 70 से ज्यादा पाकिस्तानियों को मार गिराने के बाद &#8216विजयश्री&#8217 हासिल तो की, लेकिन चार आफिसर, 05 JCO&#8217s और 47 जवानों को तोलोलिंग की पथरीली ढलानो ने लील लिया था, और लगभग इतने ही गंभीर रूप से जख्मी थे। बलिदान की इस निर्णायक घड़ी में महानायक बनकर उभरे थे कर्नल रवींद्रनाथ।

वो प्रत्येक शहीद के बच्चों और विधवाओ से वो नियमित संपर्क में रहे। उनके बच्चो की पढ़ाई, विधनाओ की पेंशन, बूढ़े बुजुर्गो की चिकित्सा के सारे मामले उन्होंने खुद संभाले। मिलिट्री स्कूल छैल धौलपुर और अजमेर में उन्होंने शहीदो के बच्चों की बेहतर पढाई और व्यक्तित्व निर्माण का जिम्मा उठाया। वहीं सेना के नाम पर वोट करने करने की बात कहने वाले पीएम मोदी ने इन परिवारों की कोई मदद नहीं की। जिससे परिवार काफी परेशानी में गुजरा। हालाकि रविन्द्रनाथ ने जिस तरह से उनका ध्यान रखा तससे उन्हे काफी मदद मिली।

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