Tuesday, April 16, 2019

देखें ,इस राज्य में लाइफलाइन बनी 'बाइक एंबुलेंस' सर्विस, नक्सलियों के डर से नहीं हुआ विकास!..

आज एक बार फिर मै खान पान से जुडी कुछ जरुरी बातों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

नई दिल्ली। नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में ऐसे कई इलाके और गांव हैं, जो अभी भी नक्सलियों के डर से बेहतर स्थिति में नहीं पहुंच सके हैं। इन इलाकों में सड़कों की स्थिति बदहाल है। कई जगहों पर नक्सलियों द्वारा सड़क बनाने और विकास काम के लिए आए कॉन्ट्रैक्ट पर गोलीबारी के मामले सामने आए हैं। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों और जंगलो में रहने वाले आदिवासी गांवों में सरकार विकास तो छोड़िए बुनियादी जरूरतों के लिए सुविधाएं भी नक्सलियों की वजह से नहीं पहुंचा पा रही हैं।

दरअसल, इन जंगलों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं को लेकर है, जहां आए दिन मलेरिया से लेकर दूसरी बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले लेती हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए भी इन इलाकों से निकल कर अस्पताल के लिए शहर तक आना बेहद कठिन काम होता है। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ में बाइक एंबुलेंस लोगों के लिए किसी देवदूत से कम नहीं है।

वहीं, कवर्धा से लेकर नारायणपुर तक ऐसे न जाने कितने इलाके हैं जहां बाइक एंबुलेंस अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं, जो लोगों के लिए वरदान बन गए हैं। जिन गांवों तक या जंगलों के अंदर बसे लोगों तक पहुंचने के लिए सड़कें नहीं होतीं अथवा चार पहिया वाहन नहीं जा सकते वहां यह बाइक एंबुलेंस आसानी से पहुंच जाती है और लोगों को नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाने का काम करती है। मनकू सोरी ऐसी ही एक संस्था के लिए बाइक एंबुलेंस चलाते हैं। मनकू का कहना है, &#8216जिन इलाकों में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाते हम कोशिश करते हैं कि उन इलाकों में जाएं और वहां बीमार लोगों को या गर्भवती महिलाओं को बाइक एंबुलेंस में बैठाकर शहर के अस्पतालों तक पहुंचाया जाएं।&#8217

Bike Ambulance become Lifeline

यही नहीं, कई बार स्थिति इतनी गंभीर होती है कि मरीज अस्पताल पहुंचने के पहले ही दम तोड़ देता है। जितेंद्र कुमार जैसे बाइक एंबुलेंस चलाने वाले लोग ऐसी स्थिति में खुद को उस दुख से अलग नहीं कर पाते। जितेंद्र का कहना है, &#8216हम कोशिश करते हैं कि गर्भवती महिलाएं या मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचा सकें, लेकिन कई बार आकस्मिक घटना हो जाती है तब हमें बहुत दुख होता है।&#8217

बता दें, सुरेश कुमार कवर्धा में बाइक एंबुलेंस चलाकर लोगों की मदद करते हैं। सुरेश कहते हैं, &#8216यह ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में नक्सलियों का प्रभाव होता है लेकिन हमें उन से डर नहीं लगता, क्योंकि हम कोशिश करते हैं कि बीमार लोगों को जल्द-से-जल्द इलाज मुहैया कराने के लिए अस्पताल ले जाएं और हम अपना काम पूरी मेहनत और निष्ठा से करते हैं।&#8217

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