Friday, May 17, 2019

मनमानी: हाईकोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा रहा ADA, नहीं वापस कर रहा किसानों की जमीन!..

आज एक बार फिर मै खान पान से जुडी कुछ जरुरी बातों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

लखनऊ। भूमि अधिग्रहण और बिना मुआवजे के निजी जमीन पर कब्जेदारी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद आगरा विकास प्राधिकरण(एडीए) का मनमाना रवैया उजागर होना शुरू हो गया है। भूमि अधिग्रहण से संबंधित कई पुराने मामले भी उजागर होने शुरू हो गए हैं, जिनमें मनमाने तरीके से किसानों की जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया और अभी तक ना ही उन्हे मुआवजा दिया गया और ना ही जमीन के बदले जमीन दी गयी।

एक ऐसा ही मामला आगरा विकास प्राधिकरण से जुड़ा हुआ सामने आया है। जहां विभाग ने सुनारी गावों के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया। जिसके बाद किसानों को ना ही सरकार द्वारा मुआवजा दिया गया और ना ही उन किसानों को जमीन के एवज में कोई जमीन दी गयी। जबकि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक किसानों को जमीन के एवज में नए भू-अर्जन अधिनियम-2013 के तहत मुआवजा देने का आदेश दे चुका है और तत्कालीन प्रमुख सचिव आवास ने सभी विकास प्राधिकरणों को ऐसे मामलों का निस्तारण करने का आदेश दे दिया था।

ये है मामला

दरअसल, आगरा शहर के गांव सुनारी के खसरा संख्या 23, नया खसरा संख्या 21ख के 3/8 भाग से आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई को लेकर पीड़ित किसान उच्च न्यायालय गए। जहां स्पष्ट कहा गया कि आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा नियमानुसार भूमि अधिग्रहण नहीं किया गया। जिसके बाद विकास प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी, जहां पर उनकी याचिका खारिज कर दी गयी और आदेश दिया गया कि किसानों को जमीन वापस की जाये।

इस संबंध में विभागीय स्तर पर पत्रों का सिलसिला जारी रहा, लेकिन किसानों अभी तक कुछ हासिल नहीं हुआ। इस मामले को लेकर तत्कालीन प्रमुख सचिव सदाकांत ने भी पत्र लिखकर कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए ऐसे सभी प्रकरणों को तीन हफ्तों में निस्तारित करने का निर्देश जारी किया। बावजूद इसके आगरा विकास प्राधिकरण अपनी कुंभकरणी नींद से नहीं जागा और किसान न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं।

वहीं आपको बताते चलें कि बीते 17 मार्च को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा इस मामले को लेकर आगरा जिलाधिकारी और विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष से तत्काल प्रभाव से आख्या मांगी गयी थी, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई भी जवाब विभाग द्वारा न्न्हिन दिया जा सका है। इस बात से साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यूपी सरकार में सरकारी मशीनरी किस हद तक अपना काम कर रही है।

बता दें कि पुरानी ज़मीनों पर कब्जेदारी और नियमों की अनदेखी कर भूमि अधिग्रहण को लेकर हाईकोर्ट ने हाल ही में सख्त रुख अपनाया है और मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश को दिया है कि ऐसे मामलों में प्रशासनिक स्तर पर दोषी पाये जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये।

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