Friday, May 17, 2019

बंगाल में पीएम मोदी की रैलियों को इजाजत देने पर कांग्रेस समेत सभी विपक्ष ने चुनाव आयोग को सवालों के घेरे में लिया

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मंगलवार को पश्चिम बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह की चुनावी रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद न ही सिर्फ बंगाल में बल्कि देश भर में सियासी माहौल पूरी तरह से गरमाया हुआ है। एक तरफ जहां हिंसा के बाद पक्ष विपक्ष की ओर से एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा हैं। वहीं दूसरी तरफ लोकतंत्र का रखवाला कहे जाने वाले चुनाव आयोग ने भड़की हिंसा को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया हैं।

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में गुरूवार रात से ही राज्य की 9 लोकसभा सीटों पर किसी भी तरह के चुनाव प्रचार और रैली पर  रोक लगाने का फैसला लिया है। जो देश में आजतक चुनाव के दौरान कभी नही लिया गया हैं।आयोग के इस फैसले के बाद चारों ओर से विपक्ष की लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही है, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया हैं कि आज ‘लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन’ है क्योंकि आयोग ने प्रक्रिया का पालन नहीं करते हुए सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों को ही इजाजत दी हैं। उन्होंने एक टवीट करते हुए अपनी और पार्टी की नाराज़गी ज़ाहिर की हैं, जिसमें उन्होंने लिखा है कि ‘लोकतंत्र के इतिहास में आज काला दिन है, पश्चिम बंगाल पर चुनाव आयोग के आदेश में अनुच्छेद 14 और 21 के अंतर्गत जरूरी प्रक्रिया का अनुपालन नहीं हुआ है और आयोग ने सबको समान अवसर देने के संवैधानिक कर्तव्य का भी निर्वहन नहीं किया।. जो संविधान के साथ किया बेहया विश्वासघात है।

इसके अलावा बयान देते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ चुनाव आयोग में उनकी पार्टी ने 11 शिकायतें की हैं लेकिन आयोग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई।बीजेपी के द्वारा बंगाल में हिंसा की गई और अमित शाह ने खुलेआम धमकाया  लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई हैं। अब गुरूवार को पीएम मोदी की  होने वाली  2 रैलियों को इजाजत दे दी गई हैं, जबकि दूसरे सभी लोगों के प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया गया हैं। ये कभी एक स्वतंत्र संवैधानिक इकाई रही संस्था में शर्मनाक गिरावट है।

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने भी एक ट्वीट कर कहा कि अगर बंगाल में स्थिति इतनी ही खराब है तो चुनाव प्रचार पर तुरंत रोक लगा देनी चाहिए, आयोग गुरुवार रात तक का इंतजार क्यों कर रहा है? क्या सिर्फ इसलिए ऐसा किया जा रहा है कि गुरुवार को प्रधानमंत्री की रैलियां होनी हैं? जहां एक तरफ कांग्रेस ने आयोग के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए निंदा की हैं, तो वही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो चुनाव आयोग द्वारा लिए इस फैसले को  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी के इशारों पर लिया गया फैसला बता दिया, उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा हैं कि चुनावी सभाओं और रैलियों पर रोक का फैसला चुनाव आयोग का नहीं,  बल्कि मोदी का है।साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा कोलकाता की हिंसा के लिए अमित शाह के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी।

आपको बता दे कि भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार अनुच्छेद 324 के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार 20 घंटे पहले ही ख़त्म करने का फ़ैसला किया है, उप चुनाव आयुक्त चंद्रभूषण कुमार ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया हैं कि देश के इतिहास में निश्चित ही ये पहला मौका है जब आयोग को चुनावी हिंसा के मद्देनजर किसी चुनाव में निर्धारित अवधि से पहले चुनाव प्रचार रोकना पड़ा हो जबकि पहले चुनाव प्रचार शुक्रवार शाम 5  बजे खत्म किया जाना था।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद पूरा विपक्ष एक जुट होकर एक ही भाषा बोलता नज़र आ रहा है, ममता बनर्जी और कांग्रेस के समर्थन में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि चुनाव आयोग का फैसला लोकतांत्रिक नियमों के खिलाफ है, मैं उन ढाई आदमियों जिन्होंने हमारे देश की हर संस्था को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल किया है और उसके साथ दुर्व्यवहार किया है, उनके अलोकतांत्रिक मार्च को रोकने के लिए हो रही लड़ाई में ममता जी का पूरा समर्थन करता हूं।

इसके अलावा बुधवार को कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने भी चुनावी नतीजो के बाद नए प्रधानमंत्री को लेकर एक बड़ा बयान दिया, जिसमें उन्होंने अपनी पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा है कि 23 मई को नतीजों के बाद अगर कांग्रेस के पक्ष में आम सहमति बनती है तो वो केंद्र में अगली सरकार का नेतृत्वस करेगी, लेकिन यदि एंटी एनडीए सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस के पक्ष में सर्वसम्म ति नहीं बनती तो पार्टी किसी और को प्रधानमंत्री बनने देगी।

एक तरफ जहां चुनाव आयोग के फैसले को विपक्ष द्वारा आड़े हाथो लिया जा रहा हैं, वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी को लेकर एक विचित्र सी बात सामने आई हैं, दरअसल प्रधानमंत्री मोदी के झूठे वादों और जुमलेबाजी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार निशाना साधते रहे है। लेकिन इस बार उन्होंने पहले तो ट्विटर के सहारे पीएम पर तंज कसते हुए उनपर ठिठोली कर डाली, उन्होंने एक मॉर्फड इमेज शेयर की। जिसमें एक शब्द  Modilie सर्च किया हुआ दिखाया जा रहा है – जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि इंग्लिश डिक्शनरी में एक नया शब्द जुड़ा है, जिसका स्नैपशॉट नीचे है।राहुल गांधी की शेयर की गई इमेज में इस शब्द को संज्ञा बताया गया था। जिसका अर्थ दिखाया गया है- अनेको बार बदला गया सच इसका एक और अर्थ बताया गया- ऐसा झूठ जो आदतन बोला जाता हो। लेकिन हद तो तब हो गई, जब कुछ ही देर बाद राहुल ने Modilies नाम का एक webpage ही बना डाला, जिसका link उन्होंने खुद अपने टविटर अकाउंट पर शेयर किया।

इस पेज को खोलते ही सबसे पहले बड़े बड़े शब्दो में मोदी का वो बयान लिखा नज़र आता हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि 130 करोड़ लोगो ने मेरा समर्थन किया।इस बयान को राहुल ने मोदी द्वारा बोले गए कई झूठ में शामिल किया हैं। इसके अलावा इस पूरे पेज पर मोदी के कई और बयान और बाते भी शामिल हैं, जिन्हें राहुल ने सीधा सीधा झूठ बताया हैं।

आपको पता हो कि राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री पर झूठे वादे करने का आरोप लगाकर हमला करते रहे हैं। इससे पहले भी मंगलवार को उन्होंने एक ट्वीट किया था कि मैं राजनीति में नई भाषा लाने पर जोर दे रहा हूं, आइए कुछ मुद्दों पर एक-दूसरे से लड़ें, आइए विचारधारा पर कड़ा संघर्ष करते है, लेकिन हमें एक दूसरे से नफरत और हिंसा नहीं करनी हैं, ये बेहद ही खराब है।

मालूम हो कि लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में आठ राज्यों की 59 सीटों पर 19  मई को होने वाले मतदान में पश्चिम बंगाल की 9 सीटें भी शामिल हैं, जिसके बाद 23 मई को नतीजो की घोषणा की जाएगी। लेकिन इस सबसे एक बात तो साफ ज़ाहिर हैं, कि देश में राजनीति के स्तर और औदे में दिन प्रतिदिन भारी गिरावट आती जा रही हैं।

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