Friday, May 3, 2019

डेथ एनिवर्सरी: फिल्म में जिसकी मां का निभाया रोल बाद में उन्हीं की बनी पत्नी, जानिए कैसे शुरू हुई नरगिस और सुनील दत्त की लव स्टोरी…

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किसने सोचा होगा कि बनारस के चौक थाने के पास जो तवायफ अपनी महफ़िल सजाए लोगों के दिलों पर राज किया करती थीं. आज उन्हीं की बेटी बॉलीवुड पर अपनी अदाकारियों से इस कदर छाप छोड़ेंगी कि उनके जिंदा न होने के बाद भी वो लोगों के दिलों में बसी रहेंगी. इस बारे में तो मशहूर नर्तक और गायिका जद्दनबाई को भी खबर न थी कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के कलकत्ता शहर में 1 जून,1929 को जिस बेटी को जन्मा उन्हें आगे चलकर देशभर के लोग मदर इंडिया के नाम से याद करेंगे. जी हां मदर इंडिया, ये नाम सुनकर जरूर आपके आंखों में सबसे पहले नगरिस दत्त का ही चेहरा आया होगा. अभिनेत्री नरगिस की शानदार अदाकारी के लिए आज भी उन्हें याद किया जाता है. तो आइए आपको एक आम लड़की के जीवन की  सैर कराते हैं.

लगभग चार दशक से हिन्दी सिनेमा में प्रेमियों दिलों पर राज करने वाली मशहूर अभिनेत्री नरगिस जब साल 1935 में केवल 6 साल की थी तब उनकी मां जद्दनबाई ने अपनी फिल्म ‘तलाश-ए-हक़’ में उनसे काम करवाया. इस फिल्म से ही इनका नाम बेबी नरगिस रखा गया था. इसके बाद चौदह साल की उम्र में डायरेक्टर महबूब खान की फिल्म ‘तक़दीर’ में अभिनेत्री के रूप में नरगिस का पहला ऑडीशन हुआ था.

भारतीय हिंदी सिनेमा में नरगिस जितनी ज्यादा अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती थी, उससे कई ज्यादा अपने आनोखे अदाकारी से जान डालने के लिए भी जानी जाती थीं. उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्मे दी, लेकिन नरगिस की एक फिल्म जिस ने मानों नरगिस की पूरी जिंदगी ही बदल कर रख दी. इस फिल्म ने न केवल नरगिस की एक्टिंग के हुनर को निखारा बल्कि इसी फिल्म से उनकी जिंदगी का रियल लाइफ हीरों उनकी लाइफ में आया था.

जितना नरगिस का फिल्मी करियर रोमांचक था उतनी ही उनकी लव लाइफ भी सुर्खियों भरी रही. अपने करियर की टर्निंग पोइंट फिल्म मदर इंडिया जिसके लिए नरगिस को ऑस्कर तक के लिए नामित किया गया था. मदर इंडिया में जिस बेटे के लिए मिशाल बनी थी क्या पता था कि वो ही फिल्मी बेटा आगे चलकर इनके प्यार में इतना खो जाएगा कि दुनिया की फिकर किए बिना उन्हें अपना हमसफर बनाने के लिए पूरी दुनिया और अपनी फैमली तक से लड़ जाएगा. नरगिस ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनकी लाइफ में कोई ऐसा भी आएगा जो उन्हें अपना बनाने के लिए हर किसी से लड़ने के लिए तैयार हो जाएगा. तो चलिए आपको बताते हैं कि कैसे शुरु हुई नरगिस और सुनील दत्त की लव स्टोरी.

नरगिस की लव स्टोरी उस वक्त से शुरू हुई जब सुनील दत्त सीलोन रेडियो में रेडियो जॉकी के रूप में काम किया करते थे. तब उनका कोई एक्टिंग से दूर-दूर तक वस्ता ना था. उस दौरान रोजाना बस लोग इनकी आवाजों को सुना करते थे.

यहां पर तरह-तरह के प्रसिद्ध लोग आए भी करते थे, जिसके चलते उन दिनों की मश्हूर अभिनेत्री नरगिस भी उस रेडियो चैनल में पहुंची थीं, उस समय इनकी जोडी राज कपूर के साथ फिल्मों में काफी हिट रही थी और यहीं वो एक जगह भी थी जहां सुनील दत्त की मुलाकात नरगिस से पहली बार हुई थी.

दरअसल सुनील दत्त को रेडियो के लिए नरगिस का इंटरव्यू लेने का काम सौंपा गया था. इस दौरान जब सुनील दत्त ने अपने सामने नरगिस को देखा तो वो इतने नर्वस हो गए कि उनसे एक भी सवाल पुछने तक की वो हिम्मत ना जुटा सके, मामला इस कदर बिगड़ गया था कि मानों उनकी नौकरी भी जाते-जाते बची. उस समय तो कैसे न कैसे सुनील दत्त ने खुद को संभाल लिया लेकिन जब दूसरी बार बिमल रॉय की फिल्म ‘दो बीघा ज़मीन’ के सेट पर नरगिस से उनकी मुलाकात हुई तो नरगिस को उन्हें दखते ही पिछला वाक्या याद आ गया और वो मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गईं. वहां नरगिस बिमल रॉय से मिलने आई थीं और सुनील दत्त काम की तलाश में गए थे.

तीसरी मुलाकात कुछ इस तरह रही कि वो जिस खूबसूरत अभिनेत्री के दिवाने बने हुए थे वो ही महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ में उनकी मां का रोल निभा रहीं थीं. इस फिल्म की शूटिंग के दौरान बार-बार सुनील नरगिस के सामने नर्वस हो जाते थे और ठीक तरह से एक्टिंग तक नहीं कर पाते थे, इस दौरान नरगिस ने उनकी बहुत मदद की जिससे वो सही तरह से एक्टिंग कर सके. इसी दरियादिली को देखते हुए सुनील को नरगिस से बहुत लगाव सा हो गया.

ऐसा बताया जाता है कि इस फिल्म में जो रोल सुनील दत्त को दिया गया वो इनसे पहले दिलीप कुमार को ऑफर किया गया था, लेकिन फिल्म में नरगिस के बेटे का रोल निभाने से दिलीप कुमार ने मना कर दिया था. उनका कहा था कि “नरगिस तो मेरी हीरोइन है, मैं उसके बेटे का रोल कैसे कर सकता हूं.” वो बता अलग है कि डायरेक्टर महबूब खान ने दिलीप कुमार को डबल रोल निभाने का ऑफर दिया था, जिसके चलते उन्हें फिल्म में बाप और बेटे दोनों का किरदार निभाने का ऑफर दिया था लेकिन फिर भी दिलीप कुमार नहीं माने थे.

बात करें सुनिल दत्त और नरगिस के करीब आने की तो एक घटना ऐसी घटी जिसने हमेशा के लिए इन्हें एक कर दिया. दरअसल गुजरात के बिलिमोर गांव में फिल्म ‘मदर इंडिया’ का सेट था. वहीं एक सीन को फिल्माए जाने के लिए वहां चारों तरफ पुआल बिछाए गए थे और उसमें आग लगाई गई. देखते-देखते आग इस तरह से फैल गई कि सीन के दौरान नरगिस आग में फंस गईं. जिसके चलते अपनी जान की बाजी लगाते हुए सुनील दत्त नरगिस को बचाने के लिए आग में कूद पड़े और नरगिस को तो उन्होंने बचा ही लिया लेकिन खुद वो बहुत जल गए थे.

उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि वो बार-बार बेहोश होने लगे. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में रोजना सुनील दत्त से मिलने के लिए नरगिस जाया करती थीं और उनकी देखभाल भी करतीं थी. इस आग वाले हादसे के बाद से नरगिस का नज़रिया सुनील की तरफ से बिलकुल बदल गया था. इस दौरान सुनील की बहन बीमार हो गईं और वो मुंबई में किसी अच्छे डॉक्टर को नहीं जानते थे. नरगिस सुनील को बिना कुछ बताए उनकी बहन को अस्पताल लेकर चली गईं और उनका इलाज करवाया.

जहां सुनील दत्त के मन में पहले से ही नरगिस को लेकर प्यार उमड़ चुका था, वहीं आग की घटना के बाद तो उन्होंने ये तय ही कर लिया था कि वो अपनी पूरी जिंदगी नरगिस के साथ ही बिताएंगे. जिसके चलते वो नरगिस को प्रपोज़ करने से खुद पर काबू न कर सके और उन्होंने नरगिस को शादी के लिए प्रपोज किया, जिसे नरगिस ने स्वीकार भी कर लिया और फिर दोनों ने 11 मार्च 1958 को शादी कर ली. जिसके बाद नरगिस ने फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया. नरगिस और सुनिल दत्त के तीन बच्चे हैं संजय, अंजू और प्रिया, जिनमें से संजय एक मश्हूर अभिनेता हैं और प्रिया दत्त राजनीती से जुड़ी हुई हैं.

पद्मश्री आर्वड से नवाजी जाने वाली पहली अभिनेत्री नरगिस राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पाने वालों में भी सबसे पहली अभिनेत्री थी. इनके नाम पर मुंबई के बांद्रा में सड़क भी है. इतना ही नहीं हर साल होने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राष्ट्रीय एकता पर बनी सबसे बेहतर फिल्म को नरगिस दत्त अवॉर्ड दिया जाता है. श्री 420 और मदर इंडिया उनकी सफलतम फिल्मे रही. पेंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित होने की वजह से नरगिस ने 3 मई, 1981 को महज 51 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. जिसके चलते वो अपने बेटे संजय दत्त की पहली फिल्म रॉकी देख नहीं पाईं. इन्हें याद कर नरगिस दत्त मेमोरियल कैंसर फाउंडेसन की स्थापना हुई.

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