Saturday, July 13, 2019

सेमीफाइनल में नंबर 7 पर क्यों उतरे धोनी? कोच रवि शास्त्री ने दिया जवाब

नई दिल्ली (12 जुलाई):  आईसीसी क्रिकेट विश्व कप सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों मिली हार बाद पहली बार टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री का बड़ा बयान सामने आया है। कोच शास्त्री ने कहा है कि एक मजबूत चौथे नंबर के बल्लेबाज की कमी ने बहुत बड़ा अंतर पैदा कर दिया। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा कि हां, मिडिल ऑर्डर में एक मजबूत बल्लेबाज की जरूरत थी। यह एक चीज थी जो हमेशा से हमारे लिए समस्या थी लेकिन इसे खत्म नहीं कर सके। केएल राहुल थे लेकिन शिखर धवन घायल हो गए, इसके बाद फिर विजय शंकर को भी चोट लग गई। हम इस पर नियंत्र नहीं पा सके। 

सेमीफाइनल मैच में महेंद्र सिंह धोनी के बैटिंग ऑर्डर को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। धोनी के बैटिंग ऑर्डर को लेकर पूछे गए सवाल पर शास्त्री ने कहा, &#8221यह टीम का फैसला था। यह बहुत आसान फैसला था और सबकी सहमति से था। आप चाहते थे कि धोनी जल्दी बैटिंग करने आएं और आउट हो जाएं। इससे लक्ष्य को हासिल कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता। हमें उनके अनुभव की बाद में जरूरत थी। धोनी सबसे शानदार फिनिशर हैं और उनका इस्तेमाल उस तरह से ना करना बहुत बड़ी गलती होती। इस बात को लेकर पूरी टीम स्पष्ट थी।&#8221

कोच रवि ने धोनी की तारीफ भी की, उन्होंने कहा, &#8221वह शानदार थे. उनका मानसिक संतुलन भी लाजवाब था। एक बात मैं आपको बता दूं, अगर वो रनआउट नहीं होते तो उनके दिमाग में पूरा गणित चल रहा था। उनके दिमाग में तय था कि जेम्स नीशाम के आखिरी ओवर के लिए कितने रन रखने हैं। वो कुछ भी करके मैच जीतना चाहते थे, जब वो वापस ड्रेसिंग रूम की तरफ आ रहे थे तब उनके चेहरे पर दिख भी रहा था।&#8221

क्या टीम ने टेस्ट मैच के ओपनर मयंक अग्रवाल से ओपनिंग करवाने और केएल राहुल को चौथे नंबर पर भेजने के बारे में सोचा? इस पर कोच शास्त्री ने कहा, &#8221बिल्कुल नहीं, सबकुछ बहुत जल्दी में हुआ. मयंक अग्रवाल जब पहुंचे तब तक हमारे पास टाइम नहीं था। अगर इस सेमीफाइनल से पहले हमारे पास एक मैच और होता तो जरूर हम ऐसा करत। जैसे ही मयंक आए, राहुल ने 60 रन मार। इसके बाद उन्होंने एक शतक लगाया। हमारे पास एक मैच और होता तो जरूर हम ऐसा कर सकते थे।&#8221

कोच रवि शास्त्री ने कहा- मैच के बाद मैंने अपने सभी खिलाड़ियों को ड्रेसिंग रूम इकट्ठा किया और उनके कहा- अपने सिर को ऊंचा रखो, गर्व करो। पिछले कुछ सालों में आपने जो कमाया है वो सिर्फ इन 30 मिनट उसे मिटा नहीं सकते। तुम सब को यह बात पता है। एक टूर्नामेंट, एक सीरीज़ या फिर सिर्फ 30 मिनट का खेल तय नहीं कर सकता। तुम सबने इज्जत कमाई है।

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