Monday, August 12, 2019

माकपा में बड़े फेरबदल की तैयारी

-डिजिटल प्लेटफॉर्म को माध्यम बनाने का फैसला

-पुराने चेहरों को विश्राम तथा युवाओं को मौका

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में माकपा इतिहास में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। हालात यहां तक खराब है कि न केवल जमीनी बल्कि शीर्ष नेताओं में पार्टी के भविष्य को लेकर दिशाहीनता देखी जा रही है। वरिष्ठ नेता भी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि पार्टी को दोबारा कैसे लोगों तक पहुंचाया जाएं क्यों न केवल पुराने नेता व कार्यकर्ता पार्टी से लगातार दूर हो रहे बल्कि नए नेता या युवा भी पार्टी से नहीं जुड़ रहे हैं। हालांकि, माकपा ने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं तक पहुंचने की कोशिश शुरू की है तथा पार्टी को उम्मीद है कि उसे सफलता मिलेगी। पार्टी का दावा है कि वह प्रदेश स्तर पर बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है जिसमें युवाओं को विशेष मौका मिलेगा। वहीं, पुराने चेहरों को विश्राम दिया जा सकता है। लोकसभा चुनाव में राज्य में अपने सबसे खराब प्रदर्शन के 2 महीने बाद माकपा राज्र में एक विशेष संदेश देने के लिए अपने संगठन में बड़े बदलाव की तैरारी कर रही है। माकपा सभी स्तरों पर अपने पुराने दिग्गज नेताओं की जगह पर नए चेहरे को मौका देने पर विचार कर रही है। 1977 से लगातार 3 दशकों तक पश्चिम बंगाल पर शासन करने वाले माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा को 2019 के चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली। यहां तक कि राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 40 पर तो पार्टी उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई थी। वाम मोर्चा को अब सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के अलावा बंगाल की राजनीति में तेजी से उभरी भारतीय जनता पार्टी से कड़ी चुनौतियां मिल रही है। मई में आए लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद से वाम दलों ने राज्य समिति की दो बैठकें आयोजित की हैं। चुनाव नतीजे में साफ तौर पर दिख गया कि राज्य में पार्टी की पकड़ कितनी कमजोर हो गई है। बैठकों में पार्टी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि संगठनात्मक परिवर्तन न केवल जमीनी स्तर और मध्य स्तरों पर बल्कि मतदाताओं को एक संदेश भेजने के लिए शीर्ष स्तर पर भी होना चाहिए। वाम दल इन दिनों सोशल मीडिरा के जरिए भी युवाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। माकपा पोलित ब्युरो सदस्य हन्नान मोल्लाह ने कहा कि पार्टी एक असाधारण स्थिति से गुजर रही है और इस स्थिति में असाधारण उपायों की जरुरत है। इससे पहले हमारे सामने केवल तृणमूल कांग्रेस था। अब हमें तृणमूल कांग्रेस के साथ ही भाजपा की दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

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