Saturday, September 14, 2019

सीएम योगी का जाबांज फैसला, 38 साल पुराने कानून को किया खत्म

यूपी की योगी सरकार ने एक जांबाज फैसला लिया है। योगी सरकार ने 38 वर्ष पुराने फैसले को पलट दिया। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि सीएम योगी ने निर्णय किया है कि सरकार द्वारा आयकर अदा करने संबंधी व्यवस्था को खत्म किया जाएगा। ऐसे में अब सीएम और मंत्रियों को अपने वेतन-भत्ते पर लागू टैक्स खुद अदा करना होगा।

यूपी में यह व्यवस्था ‘उत्तर प्रदेश मिनिस्टर्स सैलरीज, एलाउएंसेज एंड मिसलेनियस एक्ट, 1981’ के तहत लागू है। तत्कालीन सीएम Vishwanath Pratap Singh ने इस कानून को बनाए जाने के दौरान इसकी वकालत करते हुए कहा था सरकार के ज्यादातर मंत्री कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के हैं और उनकी आमदनी बहुत कम है। लिहाजा उन्हें मंत्री के तौर पर मिलने वाले वेतन-भत्ते पर पडऩे वाले टैक्स के बोझ को राज्य सरकार वहन करे। संबंधित एक्ट में यह प्रावधान है कि मंत्रियों को मिलने वाला वेतन टैक्स मुक्त रहेगा। वेतन पर आयकर की अदायगी राज्य सरकार करेगी।

Vishwanath Pratap Singh के सीएम रहने से अब तक यूपी ने 19 मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल देखे हैं। इनमें कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी, श्रीपति मिश्र और वीर बहादुर सिंह, सपा के मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव, बसपा की मायावती और बीजेपी के कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ की सरकारें और उनमें शिरकत करने वाले विभिन्न दलों के तकरीबन 1000 मंत्री शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 में मंत्रिमंडल के आयकर का बिल लगभग 86 लाख रुपये था जिसे सरकारी खजाने से अदा किया गया।

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सीएम और मंत्रियों को प्रतिमाह 1 लाख 64 हजार रुपये मिलते हैं। यह धनराशि मूल वेतन और भत्तों को मिलाकर है। इसमें 40 हजार रुपये मूल वेतन, 50 हजार रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 30 हजार रुपये चिकित्सा प्रतिकर भत्ता, 20 हजार रुपये सचिवालय भत्ता और 800 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 24 हजार रुपये दैनिक भत्ता दिये जाते हैं। सीएम और मंत्रियों का मूल वेतन पहले 12 हजार रुपये प्रतिमाह था जिसे अखिलेश यादव की सरकार में बढ़ाकर 40 हजार रुपये किया गया था। इसके पहले वर्ष 1981 में सीएम का वेतन बढ़ाया गया था।

ये मंत्री नहीं लेते वेतन:

योगी सरकार में एक ऐसे भी मंत्री हैं जो वेतन नहीं लेते। स्टांप व पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने पिछले दिनों हुए मंत्रिमंडल विस्तार में शपथ ली थी। मंत्री पद की शपथ के बाद ही उन्होंने घोषणा कर दी कि वह अपना मूल वेतन नहीं लेंगे

सीएम समेत पूरे मंत्रिमंडल को मंत्री के तौर पर दिए जाने वाले वेतन-भत्ते पर आयकर की अदायगी राज्य सरकार 38 वर्षों से साल-दर-साल अपने खजाने से वहन करती आ रही है। ‘राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है’ जैसे नारे के नायक रहे विपी सिंह ने यूपी के सीएम रहते 1981 में इस व्यवस्था का सूत्रपात किया था। योगी सरकार ने लगभग चार दशकों से जारी इस व्यवस्था को खत्म करने का फैसला किया है।

    Kangana Ranaut तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे.जयललिता के जीवन पर आधारित बायोपिक में काम करने जा रही है जिसके लिए उन्होंने अच्छी खासी रकम चार्ज की है। Kangana का कहना है…

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