Wednesday, October 2, 2019

क्या थे बालाकोट एयर स्ट्राइक के अति गोपनीय रहस्य !

पाकिस्तान के भीतर घुसकर भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने 25 और 26 फरवरी की रात जैश ए मोहम्मद के बालाकोट स्थित आतंकी ठिकाने पर जिस एयर स्ट्राइक से दुनिया को चौंका दिया था उसका 100 प्रतिशत प्रामाणिक ब्यौरा NEWS1इंडिया पेश कर रहा है। पुलवामा हमले के 11 दिन बाद हुई इस एयर स्ट्राइक का कंट्रोल रुम पश्चिमी कमान के प्रमुख एयर मार्शल चंद्रशेखरन हरि कुमार संभाल रहे थे। इस मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के दो दिन बाद वो रिटायर हो गए थे। NEWS1इंडिया के राजनीतिक संपादक संजय सिंह को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एयर स्ट्राइक से जुड़े कई रहस्यों का खुलासा किया। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद यह किसी भी मीडिया को दिया उनका पहला इंटरव्यू है। 

वायु सेना में 39 साल की सेवा के 3300 घंटे की फाइटर फ्लाइंक दर्ज कर चुके एयर मार्शल हरि कुमार के लिए उनके रिटायरमेंट के आखिरी पंद्रह दिन बेहद रोमांचक साबित हुए। यह वह समय था जब उन्होंने बालाकोट पर एयर स्ट्राइक की पूरी रुपरेखा तैयार की और उसे बखूबी अंजाम दिया। एयर स्ट्राइक की रात की सार्वजनिक करने लायक पूरी कहानी और उसकी तैयारियों का ब्यौरा उन्होंने संजय सिंह के साथ बातचीत में साझा किया।

प्रस्तुत है एयर मार्शल चंद्रशेखरन हरि कुमार से पॉलिटिकल एडिटर संजय सिंह की बातचीत के प्रमुख अंश- 

एयर स्ट्राइक

संजय सिंह- एयर स्ट्राइक करने का पहला फैसला कब और कैसे लिया गया?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : 14 फरवरी 2019 को जिस दिन पुलवामा हुआ, उसी दिन एयरफोर्स चीफ ने मुझसे बात की थी। उनका कहना था कि बहुत बड़ा हमला हुआ और हमारी भूमिका की जरुरत पड़ सकती है। देश की किसी भी उम्मीद पर पूरी तरह से खरा उतरने के लिए हमारे पास योजना होनी चाहिए। पुलवामा हमले की पृष्ठभूमि में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक बुलाई गई। उसमें सेना और नौसना के अलावा एयरचीफ को भी बुलाया गया। चीफ ने ही वहां एयर स्ट्राइक का ऑप्शन बताया था।

संजय सिंह- इसके बाद तैयारी कैसे शुरु हुई?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : इस डिटेल में जाने का कोई फायदा नहीं है। इतना तय है कि हम मिशन के लिए तैयार थे। हमें टारगेट चाहिए थे।

संजय सिंह- आपको उन टारगेट्स (बालाकोट में जैश ए मोहम्मद के आतंकी ठिकाने) की जानकारी कब मिली?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : 25 और 26 फरवरी की रात मिशन को अंजाम देना था। उससे 7 दिन पहले हमें ये जानकारी दे दी गई थी।

संजय सिंह- टारगेट्स किसने दिए थे?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : खुफिया एजेंसियों ने। सरकार ने आतंकी ठिकानों की जानकारी खास तौर से रॉ से ली थी। यह एजेंसी विदेशी मामलों पर नजर रखती है।

संजय सिंह- आप लोगों ने कितने टारगेट चुने थे?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : यह आपके लिए जानना जरुरी नहीं है। हां, इतना तय था कि हम नागरिक आबादी को चपेट में नहीं लेना चाहते थे। पिन प्वाइंट कर आतंकी ठिकानों को चुना गया था। जहां-जहां आम लोगों को नुकसान हो सकता था, उन ठिकानों को हटा (रुल आउट) दिया गया था। हमारा मकसद आतंक पर चोट करना था। बालाकोट उसके लिए सबसे उपयुक्त निशाना था।

एयर स्ट्राइक

संजय सिंह- मिशन के लिए पायलटों का चयन कैसे किया गया?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : यह जानने से किसी को कोई फायदा नहीं होगा। वायु सेना के लिए यह एक मिशन था और हमनें इसमें हर जरुरी संसाधन पूरी तरह से झोंक दिया था।

संजय सिंह- मिशन की रात यानी 25 फरवरी को क्या हुआ था? उस शाम तो आपके रिटायर होने के उपलक्ष्य में विदाई समारोह आयोजित किया था। 29 फरवरी 2019 को आपका रिटायरमेंट था।

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : दिल्ली के इंडिया गेट पर आकाश मैस की वह शाम मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगी। उस दौरान कई संयोग एक साथ जमा हो गए थे। उसी रात 12 बजे के बाद मेरा जन्मदिन था, लेकिन इन सबसे आगे मेरे जहन में एक बड़ा मिशन था। मेरे लिए यह जीवन की सबसे महत्ववपूर्ण रात थी। इस विशेष मिशन की किसी को भनक नहीं थी। चूंकि, विदाई समारोह पहले से तय था इसलिए सीक्रेसी बनाए रखने के खातिर इसे स्थगित नहीं किया गया। पार्टी में मैंने वेटर को बुलाया और उसके कान में कहा कि लाइम कोर्डियल (जूस और चीनी से बनी नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक) की डबल डोज के साथ मुझे पानी देना ताकि कलर सिंगल मॉल्ट व्हिस्की सा दिखाई दे। कार्यक्रम में करीब 80 अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान एयरचीफ मेरे पास आए और मुझे लॉन की ओर ले गए। वहां मुझसे अंतिम तैयारियों के बारे में पूछा। चीफ ने कहा कि जब ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो जाए तो फोन उठाकर सिर्फ ‘बंदर’ बोल देना।

संजय सिंह- मिशन को सीक्रेट रखने के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ी?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : मुझे पत्नी तक से यह बात छिपाए रखनी थी। आकाश मैस से रात को लौटते समय मैंने पत्नी से कहा कि कल शायद विशेष बच्चों के लिए चंडीगढ़ में बने स्कूल के उद्घाटन में नहीं जा सकूंगा। यह सुन वो मुझसे बहुत नाराज हो गई थी। वह पश्चिमी कमान में एयरफोर्स वाइफ्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष होने के नाते मेरे साथ एयरक्राफ्ट में चलने की हकदार थीं। पश्चिमी कमान मुख्यालय (चंडीगढ़ में) पहुंचते ही मैं जरूरी काम के बहाने घर से निकलकर मिशन के ऑपरेशन रुम में पहुंच गया। इस बीच कम्युनिकेशन के सारे साधन खामोश कर दिए गए थे। सब कुछ वायु सेना के समर्पित नेटवर्क पर ही हो रहा था। मिशन की जानकारी मुझे सीधे एयरचीफ को देनी थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के सम्पर्क में थे। वो प्रधानमंत्री को पूरी जानकारी दे रहे थे। रात के बारह बजे उस समय असमंजस की हालत आ गई जब घर से संदेश आया कि कुछ दोस्त लोग केक लेकर जन्म दिन मनाने पहुंच गए हैं। चूंकि रात 12 बजे के बाद मेरा जन्मदिन भी था इसलिए मैं तुरंत घर वापस गया और यह रस्म निभाकर फिर कंट्रोल रूम आकर मिशन में लग गया।

संजय सिंह- मिशन के लिए ग्वालियर से भी कुछ विमान उड़े थे, उस समय ग्वालियर में क्या हो रहा था?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : गोपनीयता की खातिर हमने इस बात पर गहन विचार किया कि ग्वालियर में अपने बेस के आस-पास लोकल एरिया में क्या इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं जाम कर दी जाएं? लेकिन आखिरकार तय किया गया कि इस तरह का कोई भी कदम गोपनीयता को खत्म कर सकता है।

एयर स्ट्राइक

संजय सिंह- लेकिन बड़ी संख्या में फाइटरों की गतिविधि को कैसे गोपनीय रखा जा सकता था?

हमने इसके लिए व्यापक रणनीति बना ली थी। मिशन पर जाने वाले जांबाज पायलटों से व्यक्तिगत तौर पर मेरा मिलना जरुरी था। मैं 21 फरवरी को ग्वालियर गया। मिशन के पायलटों से मेरी सीधी मुलाकात हुई। पहाड़ों का कवर लेने के लिए हमने मिराज-2000 विमानों को बरेली की ओर रवाना किया। वहां आसमान में उनकी रिफ्यूलिंग की व्यवस्था थी। लेकिन एक बड़ी समस्या उनकी उड़ान को सीक्रेट रखने की थी। बरेली के इस हवाई मार्ग की दिक्कत यह थी कि दिल्ली से रवाना होने वाली रोज की सिविलियन उड़ानें ऊपर की ओर रुख कर रही होती हैं, जबकि पूर्व से आने वाली घरेलू और विदेश उड़ानें नीचे उतर रही होती हैं। ऐसे में नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट (आईजीआई) पर लगे रडार में बड़ी संख्या में फाइटर विमानों की ब्लिप आने से इसको लेकर हल्ला मच सकता है। इस संभावना को नकारने के लिए आईजीआई एयरपोर्ट पर वायु सेना के एक अधिकारी को विशेष सरकारी दूत के साथ भेजा गया ताकि रेथियॉन रडार पर आने वाली ब्लिप (एक तरह की सूचना) को नजरंदाज कराया जा सके।

संजय सिंह- एक बड़ा सवाल देशवासियों के मन में है कि इस एयर स्ट्राइक के लिए 25-26 फरवरी की रात का समय ही क्यों चुना गया?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : कुछ कारण तो मैं आपको नहीं बता सकता लेकिन मकसद से जुड़ी तीन परिस्थितियों से आपके सवाल का समाधान हो जाएगा। पहला और बड़ा कारण यह था कि हम ऐसे समय हमला करना चाहते थे जब सभी आतंकी एक ही जगह जमा हों। यह रात का समय ही हो सकता था। हमने गौर किया था कि इस आतंकी ठिकाने पर सुबह चार बजे हलचल शुरु हो जाती है, जब सलात अल फज्र की नमाज का समय होता है। लिहाजा एक घंटे पहले वे अपने बिस्तरों में होने थे। भारत में उस समय साढ़े तीन बजे होंगे और पाकिस्तान में तीन बजे का वक्त होगा। दूसरा कारण, चांद की स्थिति थी। 19 फरवरी को पूर्णमासी थी। 26 फरवरी को मिशन के समय 3 से 4 बजे की विंडो में चांद क्षितिज से 30 डिग्री पर होना था। ऐसे में उसकी चांदनी आपरेशन के लिए एकदम आदर्श थी। उस दिन पश्चिमी हलचलों का असर भी कम था। सटीक बमबारी में तेज हवाएं आड़े आ सकती थीं। इसका भी ख्याल रखा गया।

संजय सिंह- मिशन के दौरान ऐसी कोई सूरत भी बनी जिससे आपकी धड़कने बढ़ गई हों?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : हां, एक मौका आया था। दरअसल हमारे फाइटर जब अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे तो हमने देखा कि मुरीद (रावलपिंडी के पास एक जगह, यहां पाकिस्तान का एक एयर बेस है) के आकाश में पाकिस्तानी वायु सेना का एक टोही विमान और एक लड़ाकू विमान गश्त कर रहा है। उन्हें वहां से भटकाने के लिए हमने दो सुखोई-30 और चार जगुआर विमानों को बहावलपुर की ओर तेजी से रवाना किया। हमारे इन विमानों की मूवमेंट देख पाकिस्तानी विमान उनकी ओर लपके और खतरा टल गया। हमारे फाइटर पोजिशन ले चुके थे। पहली एयरस्ट्राइक 3 बजकर 28 मिनट पर हुई और चार बजे तक मिशन पूरा हो गया था। सभी लड़ाकू विमान सुरक्षित लौटकर पश्चिमी कमान के दो अड्डों पर उतर गए। उसके बाद मैंने चीफ के कहे मुताबिक उनके कानों में ‘बंदर’ शब्द बोल दिया।

संजय सिंह- पाकिस्तानी एयरफोर्स की क्या प्रतिक्रिया थी?

एयर मार्शल सी. हरिकुमार : वे हाई अलर्ट पर थे, लेकिन इस स्ट्राइक से वे हक्के-बक्के रह गए थे। हमने गौर किया कि स्ट्राइक के तुरंत बाद उनके विमान बालाकोट के आकाश में मंडरा रहे थे। शायद उन्हें डर था कि एक और स्ट्राइक होने वाली है।

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