Monday, October 21, 2019

Haryana Assembly Poll 2019: ‘लाल’ घरानों के सामने अपना वजूद बचाने की चुनौती

Haryana Assembly Poll 2019 की 90 विधानसभा सीटों के लिए आज यानी सोमवार को मतदान किया जा रहा हैं। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। जाट प्रभुत्व वाली कुछ सीटों पर दुष्यंत चौटाला की पार्टी JJP भी चुनौती दे रही है। इस चुनाव में खासकर तीन ‘लाल’ घरानों के सामने अपना वजूद बचाए रखने की चुनौती है जिन्हें हरियाणा की सियासत का कभी बेताज बादशाह कहा जाता था। ये घराने हैं- पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल, पूर्व सीएम बंसीलाल और भजनलाल परिवार।

हरियाणा की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले तीनों लाल तो अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उनके वारिस तीनों घरानों की राजनीति को आगे बढ़ा रहे है। हालांकि, उनके सामने अपने वजूद को बचाए रखने की चुनौती भी है।

हरियाणा की सियासत करीब चार दशक तक बंसीलाल, देवीलाल और भजनलाल के इर्द-गिर्द ही रही है। हरियाणा के ये तीनों ‘लाल’ प्रदेश की सत्ता के सिंहासन पर काबिज होने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति के भी बड़े चेहरे रहे हैं। लेकिन, हरियाणा के मौजूदा राजनीतिक माहौल में बंसीलाल, देवीलाल और भजनलाल के ‘लालों’ को अपना सियासी वजूद बचाए रखने के लिए लाले पड़ रहे हैं।

हरियाणा की सियासत में कभी चौधरी देवीलाल की जबरदस्त तूती बोलती थी। देवीलाल की पार्टी ने 1987 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 90 में से 85 सीटें जीतकर चारों तरफ तहलका मचा दिया था। देवीलाल दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। हरियाणा के साथ-साथ पंजाब में विधायक रहे देवीलाल दो अलग-अलग सरकारों में देश के डिप्टी पीएम भी बने। उनकी राजनीतिक विरासत बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने संभाली और जो 4 बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे।

तीन दशक के बाद देवीलाल की विरासत संभाल रहा चौटाला परिवार दो धड़ों में अब बंट चुका है। ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला ने इनेलो से अलग होकर JJP पार्टी बना ली है। जबकि इनेलो की कमान ओम प्रकाश चौटाला और उनके छोटे बेटे अभय चौटाला के हाथों में है। अजय चौटाला जेल में हैं तो उनकी विरासत उनके दोनों बेटे दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला संभाल रहे हैं। इनेलो और JJP दोनों पार्टियां अपने वजूद को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

चौधरी बंसीलाल को हरियाणा का निर्माता कहा जाता है। वह कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। वह तीन बार हरियाणा के सीएम रहे। उनकी राजनीतिक विरासत छोटे बेटे सुरेंद्र चौधरी ने संभाली और वह विधायक व सांसद चुने गए, लेकिन 2005 में हेलीकॉप्टर हादसे में उनकी मौत हो गई। इसके बाद अपने पति और ससुर की विरासत को संभालने के लिए किरण चौधरी ने राजनीति में कदम रखा। वह तीन बार विधायक चुनी गई।

बंसीलाल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए किरण चौधरी ने अपनी बेटी श्रुति चौधरी को 2009 में उतारा और वह भिवानी से चुनकर संसद पहुंची। इसके बाद 2014 और 2019 में लड़ी, लेकिन वह जीत नहीं सकीं। ऐसे में विधानसभा चुनाव बंसीलाल परिवार के लिए चुनौती कम नहीं है। बंसीलाल परिवार से किरण चौधरी और रणबीर महेंद्रा के अलावा उनके दामाद सोमबीर सिंह कांग्रेस से चुनावी मैदान में हैं।

पंचायत में पंच से राजनीति की शुरुआत करने वाले चौधरी भजनलाल 3 बार हरियाणा के सीएम रहे। भजनलाल किसानों के कद्दावर नेता माने जाते थे। हरियाणा की सियासत में पहले गैर जाट नेता थे, जिनकी तूती बोलती थी। वह अपने राजनीतिक जीवन में कभी चुनाव नहीं हारे। वह 9 बार विधायक चुने गए। हालांकि 2007 में उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़कर हरियाणा जनहित कांग्रेस नाम से अलग पार्टी बनाई।

भजनलाल की राजनीतिक विरासत चंद्रमोहन बिश्नोई और कुलदीप बिश्नोई संभाल रहे हैं। चंद्रमोहन हरियाणा के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और 2014 में वो चुनाव हार गए हैं। हरियाणा जनहित कांग्रेस की कमान कुलदीप बिश्नोई के हाथ में थी, जिन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में विलय कर दिया है। कुलदीप बिश्नोई अपने पिता की सीट आदमपुर से मौजूदा विधायक थे और उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई हांसी से विधायक थीं।

2019 के लोकसभा चुनाव में उनके बेटे भव्य बिश्नोई हिसार से चुनाव में उतरे थे,लेकिन जीत नहीं सके। इस बार के विधानसभा चुनाव में कुलदीप बिश्नोई के खिलाफ भाजपा ने सेलिब्रेटी सोनाली फोगाट को उतारकर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी है।

    अक्षय कुमार जो की हाउसफुल का अहम हिस्सा रहे है अब अपनी नेक्स्ट सीक्वल हाउसफुल 4 के प्रमोशन में लगे हुए है। शनिवार रात को वो प्रमोशन के लिए ‘द…

    No comments:

    Post a Comment