Saturday, November 30, 2019

देखें, प्रदूषण बन रहा है फेफडे कैंसर का कारण, जानिए लक्षण और बचने का उपाए|जनता से रिश्ता..

आज एक बार फिर मै कुछ टेक्नोलॉजी से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। फेफड़ों के कैंसर से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहिए, जिसमें अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में मृत्यु दर अधिक है, जब कैंसर के बारे में बात की जाती है, तो हम कह सकते हैं कि सबसे पहले कोलन कैंसर आता है और फिर फेफड़ों का कैंसर आता है। यह दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है जो भारतीय आबादी को प्रभावित कर रहा है और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। भारत में हम कह सकते हैं कि हर साल लगभग 10-12 लाख लोग कैंसर से पीड़ित होते हैं और उसमें से लगभग 9 प्रतिशत मामले फेफड़ों के कैंसर के हैं।

ऑनक्‍वेस्‍ट लेबोरेटरीज लिमिटेड के एमडी और सीओओ डॉक्‍टर रवि गौड़ का मानना है कि, फेफड़ों के कैंसर को नियंत्रित करने के लिए इसके बढ़ने के मुख्य कारणों को समझना चाहिए। 50 प्रतिशत मामलों में फेफड़े के कैंसर का सबसे आम कारण तंबाकू और धूम्रपान है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्थिति खतरनाक है, लगभग 70 लाख तंबाकू के प्रत्यक्ष उपयोग से और लगभग 9 लाख लोगों निष्क्रिय धूम्रपान के कारण मर जाते हैं।

क्‍यों होता है फेफड़ों का कैंसर

हालांकि, फेफड़ों के कैंसर के बारे में बात करते हुए हमें यह भी पता होना चाहिए कि तंबाकू और धूम्रपान के अलावा भी कुछ अन्य कारण हैं। प्रदूषण भी, जो इन दिनों देश में एक गंभीर समस्‍या है, फेफड़ों के कैंसर का एक कारण है। धूम्रपान, सिगरेट पीने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदूषण भी एक प्रकार से धूम्रपान करना ही है। धूल के कण फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं और यह धूम्रपान करने जितना ही घातक है। वास्तव में, प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क के कारण फेफड़े के कैंसर का अनुपात अब 10 में से 3 मामलों का है। एक अन्य कारक कार्सिनोजेन्स से संपर्क है। लेकिन प्रमुख कारण धूम्रपान ही है।

लोगों के विशेष वर्ग में फेफड़ों के कैंसर की घटना के बारे में बात करें तो, मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग में स्टेज-2, स्टेज-3 या स्टेज-4 तक पहुंच जाता है क्योंकि वे शुरुआती स्क्रीनिंग के लिए अस्पताल नहीं जाते हैं। दूसरी ओर, उच्च वर्ग नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच के लिए जाता है इसलिए कैंसर का प्राथमिक स्तर पर पता चल जाता है। इसलिए, शुरुआती जांच महत्वपूर्ण है और वह लोग करते हैं जो अधिक जागरूक हैं। अन्य कैंसर के मुकाबले फेफड़े के कैंसर का पता लगाने में बहुत देर हो जाती है। अन्य कैंसर के लक्षणों को लोग जल्दी देख सकते हैं या महसूस कर सकते हैं और इस प्रकार चरण-1 में भी कैंसर का पता लगाया जा सकता है जिससे प्रभावी इलाज हो सकता है। फेफड़ों के कैंसर का देर से पता चलने की वजह से जीवित रहने की दर 1 से 2 साल है, जबकि अन्य प्रकार के कैंसर में, जो प्रारंभिक अवस्था में पता चल जाते हैं, यह 5-20 वर्ष तक है।

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