Sunday, December 1, 2019

जानिए आखिर क्यों नहीं उद्धव ठाकरे के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए सोनिया-राहुल?

महाराष्ट्र में राजनीति सियासत लगभग खत्म हो गया है। इन सब अटकलों के बीच महराष्ट्र के सीएम को भी चुन लिया गया है। महराष्ट्र के सीएम शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे बन गए हैं। जहां शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाना कांग्रेस की बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। कई राज्यों में विपक्षी दलों की फूट का राजनीतिक लाभ लेते आ रही बीजेपी के सामने कांग्रेस-एनसीपी की यह जीत बड़े मनोवैज्ञानिक मायने रखती है। बता दें कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

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कयास लगाए जा रहे थे कि राहुल और सोनिया उद्धव ठाकरे के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता का संदेश देंगे। लेकिन तमाम अटकलों के बीच राहुल और सोनिया ने उद्धव ठाकरे के शपथ ग्रहण समारोह शामिल नहीं हुए। जबकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पत्र लिखकर उद्धव ठाकरे को शुभकामनाएं दी और शपथ समारोह में शामिल नहीं होने के लिए खेद जताया।

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पार्टी के एक नेता के मुताबिक अखिल भारतीय स्तर पर बीजेपी के विकल्प के रूप में जनता के सामने कांग्रेस का ही नाम सामने आता है। इसलिए कांग्रेस केवल महाराष्ट्र के गणित को ध्यान में रखकर नहीं चल सकती थी। उसे पूरे देश के मतदाताओं को संदेश देना था।

नेता के अनुसार मुस्लिम समाज के एक बड़े संगठन जामिअत-उलेमा-ए-हिंद ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपील की थी कि वे महाराष्ट्र की सरकार में शिवसेना के साथ शामिल न हों क्योंकि इससे पूरे देश में गलत संदेश जाएगा। इस पत्र ने भी कांग्रेस नेतृत्व की उलझन बढ़ा दी थी।

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दिल्ली प्रदेश के एक कांग्रेस नेता के अनुसार राजधानी दिल्ली विधानसभा चुनाव आने वाला हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने जबरदस्त तरीके से अपने वोटरों के बीच वापसी की है। इस बढ़त में उन मुस्लिम वोटरों की संख्या काफी अधिक है जो राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी का विकल्प पाना चाहते हैं।

ऐसे में ठीक चुनाव के वक्त अगर पार्टी नेतृत्व उद्धव ठाकरे के साथ खड़ा दिखता तो उससे मुस्लिम मतदाताओं में नकारात्मक संदेश जा सकता था। इसलिए कांग्रेस नेतृत्व ने शपथ ग्रहण समारोह से दूरी रखकर मतदाताओं के बीच एक अच्छा संकेत दिया।

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