Thursday, January 16, 2020

वर्ष 2018 में बच्चों के लापता होने के मामले में बंगाल टॉप पर

लापता किशोरियों की संख्या है ज्यादा

बच्चों को ढूंढ़ निकालने के मामले में भी बंगाल ने मारी है बाजी

कोलकाता, समाज्ञा : आज पूरा देश मानव तस्करी से जूझ रहा है। यहां किशोरियों के लापता होने के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। अपराधी गलत मंशा से और देह व्यवसाय सहित कई गलत कार्यों के लिए किशोरियां का अपहरण करते हैं। इस बाबत ही देश में बच्चों के लापता होने के कई मामले सामने आये हैं। बच्चों के लापता के मामले में बंगाल शीर्ष पर है। जानकारी के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लापता होने के मामले में बंगाल पूरे देश में टॉप पर है लेकिन इन बच्चों को ढूंढ़कर निकालने के मामले में भी बंगाल ने नंबर 1 का पायदान संभाल कर रखा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में बंगाल में सबसे ज्यादा बच्चे लापता हुए हैं। बंगाल में 16027 बच्चे लापता हुए हैं जिनमें किशोरियों की संख्या सबसे ज्यादा है। लापता बच्चों में जहां 3645 किशोर है वहीं लापता किशोरियों की संख्या 12382 है। हालांकि बंगाल में वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2018 में लापता बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। वर्ष 2017 में 7822 बच्चे लापता है जबकि वर्ष 2018 में 8205 बच्चे लापता है। एनसीआरबी रिपोर्ट ने वर्ष 2017 और 2018 को मिलाकर ही आंकड़ों को दर्शाया है। इसके अनुसार ही बंगाल देश में अव्वल है। लापता बच्चों के मामले में दूसरे स्थान पर मध्यप्रदेश है जहां 15320 बच्चे लापता है, बिहार तीसरे स्थान पर जहां पर 12072 बच्चे लापता है, चौथे स्थान पर महाराष्ट्र है जहां 6928 बच्चे लापता है, पांचवें स्थान पर उत्तरप्रदेश है जहां 5704 बच्चे लापता है, छठवें स्थान पर तमिलनाडु है जहां 5333 बच्चे लापता है, सांतवें स्थान पर तेलंगाना है जहां 4410 बच्चे लापता है, आठवें स्थान पर छत्तीसगढ़ है जहां 4237 बच्चे लापता है, नौंवे स्थान पर हरियाणा है जहां 3739 बच्चे लापता है जबकि दसवें स्थान पर राजस्थान है जहां 3521 बच्चे लापता है।

एक नजर लापता बच्चों के मामले में टॉप 10 राज्य

बच्चों की बरामदगी के मामले में भी बंगाल है नंबर 1 पर

बंगाल में बच्चों की लापता होने के जितने भी मामले आये हैं उन सभी मामलों की जांच को काफी गंभीरता से लिया गया। इसके ही कारण लापता बच्चों की बरामदगी में पुलिस प्रशासन को सफलता मिली और बंगाल ने बच्चों को ढूंढ़ निकालने के मामले में भी नंबर 1 की कुर्सी बरकरार रखी। एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार आंकड़ों पर नजर डाली जाये तो बंगाल इस मामले में भी नंबर 1 पर है। वर्ष 2018 में बंगाल में 16027 लापता बच्चों में से 10205 बच्चों को ढूंढ़ निकाला जा चुका है। साथ ही किशोरियों की बरामदगी की संख्या भी किशोर की तुलना में ज्यादा है। इन 10205 बच्चों में किशोरियों की संख्या 7904 है जबकि किशोरों के संख्या 2301 है। एनसीआरबी रिकॉर्ड के अनुसार दूसरे स्थान पर मध्यप्रदेश जहां 9284 बच्चों को बरामद किया गया, तीसरे स्थान पर बिहार है जहां 6967, तमिलनाडु चौथे स्थान पर जहां 4038, पांचवें स्थान पर महाराष्ट्र है जहां 3214, छठवें स्थान पर तेलंगाना है जहां 3152, सांतवें स्थान पर छत्तीसगढ़ है जहां 2920, आठवें स्थान पर आंध्रप्रदेश है जहां 2610, नौवें स्थान पर हरियाणा है जहां 2576 और दसवें स्थान पर राजस्थान है जहां 2479 बच्चों को ढूंढ़कर निकालने में सलफता मिली।

15 से 18 वर्ष के बीच की किशोरियां और किशोर ज्यादा हुए हैं लापता

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार गौर किया जाये तो 15 से 18 वर्ष के आयु के बीच की किशोरियां तथा किशोर ज्यादा लापता हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में लापता हुए 37543 लड़कों में 15 से 18 वर्ष के आयु के 18914 किशोर लापता हुए हैं जबकि 6 से 14 वर्ष की आयु के 14868 किशोर लापता हुए हैं। वहीं 5 वर्ष से कम उम्र के लापता हुए बच्चों की संख्या 3761 है। वहीं लापता हुई 77952 लड़कियों में 15 से 18 वर्ष के आयु की 59960 किशोरियां शामिल है जबकि 6 से 14 वर्ष के आयु के बीच की 14625 किशोरियां लापता हुई है। वहीं 5 वर्ष से कम की 3367 बच्चियां लापता हुई है।

Written &#8211 बबीता माली

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