Saturday, June 13, 2020

चीन ने चली बड़ी चाल, भारत को 3 तरफ से घेरा

जहां भारत पहले पाकिस्तान से खतरा महसूस करता था और ज्यादा से ज्यादा यह सोचता था कि उसे सिर्फ अगर कभी गंभीर खतरा हुआ भी तो वह पाकिस्तान और चीन से होगा लेकिन अब इसमें नये नाम जुड़ते चले जा रहा है जिसमें नेपाल का नाम शामिल हो गया। उसने बाकायदा जिंदगी भर का विवाद बनाने लिए नया नक्शा जिसमें भारत के इलाकों को नेपाल का बताया गया है संसद से पास करवा दिया है। अभी खबर है कि उसके सशस्त्र बलों ने सीमा पर फायरिंग भी की है। यह विवाद का स्थायी रुप है जिसे नेपाल अब जब तब भारत के सामने उठाते रहेगा।

हालांकि भारत को यह खतरा इन तीन देशों से हीं नहीं है अब इसमें कभी बांग्लादेश और श्रीलंका का नाम जुड़ सकता है।
बांग्लादेश तो तैयार ही था लेकिन वह पर कट्टरपंथिया की सरकार नहीं बन पाई और शेख हसीना की भारत से नजदीकियों की वजह से फिलहाल शांति है लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं रहने वाली है। रही बात श्रीलंका की तो वहां पर इस समय जो पार्टी सत्ता में है उसका झुकाव चीन की तरफ ही है। वह भी कोई न कोई मौका भारत से खटास बढ़ाने का जरुर ढूंढेगा।

इसके अलावा भारत की अपनी अंदरुनी समस्याएं भी कम नहीं है। एक तरफ आतंकवाद दनदना रहा है तो नक्सली भी कम समस्याएं पैदा नहीं कर रहे हैं। पंजाब जैसे राज्य में भी अब कई लोग घुमा फिराकर खालिस्तान की बात करने लगे हैं। तो ऐसे में भारत क्या करें ?

क्या अमेरिका जैसे स्वाथी राष्ट्रों को अपने यहां पर बैठा ला ताकि वह इन चीन और उसके दुमछल्लें राष्ट्रों की नाक में तो दम करें ही भारत का भी कभी कभार टेटुआ दबा सकें। क्या यह सही रहेगा ?

युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। अगर भारत सबक सिखाने के लिए इन छोटे राष्ट्रों पर हमला भी करता है तो उससे कोई फायदा नहीं होने वाला।छोटे देशों की कोई नीति निर्धारित नहीं होती। जो बड़ा देश उन्हें पैसा देता है वह उनकी गोद में बैठ जाते हैं। जैसे नेपाल कर रहा है।

लेकिन भारत को चीन से ही सबक लेना होगा जैसे वह भारत को धमका रहा है भारत को भी आगे बढ़कर नेपाल, पाकिस्तान और जो भी इनकी लिस्ट में शामिल हो उनके ईंट का जवाब पत्थर में देना होगा। जब फायदे से ज्यादा नुकसान का भय होगा तो यह छोटे देश अपनी सीमा में ही रहेंगे।

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