Sunday, June 21, 2020

भारत ने कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर चीन के अतिरंजित और अनुचित दावे उसे स्वीकार्य नहीं

भारत ने कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर चीन के अतिरंजित और अनुचित दावे उसे स्वीकार्य नहीं हैं। इसने कहा कि गलवान घाटी क्षेत्र के बारे में भारत की स्थिति ऐतिहासिक तौर पर स्पष्ट है। चीन के प्रवक्ता द्वारा गलवान घाटी क्षेत्र की घटनाओं के बार में कल जारी किए गए बयान पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह के दावे खुद चीन की अतीत की स्थिति के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि गलवान घाटी सहित भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में समूची वास्तविक नियंत्रण रेखा-एल ए सी की भारतीय सैनिकों को पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने एलएसी का हमेशा सम्मान किया है और भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कभी कोई उल्लंघन नहीं किया। वास्तव में भारतीय सैनिक लम्बे समय से वहां गश्त करते रहे हैं और कभी कोई घटना नहीं हुई। भारत ने जो भी ढांचा वहां खड़ा किया है, वह सब स्वाभाविक तौर पर अपनी सीमा के भीतर बनाया गया है।

प्रवक्ता ने कहा कि चीन ने इस वर्ष मई के शुरू से भारत की सामान्य परम्परागत सैन्य गश्त में रुकावटें डालना शुरू कर दिया। जिसके नतीजे में झड़पें हुई, जिनका समाधान द्विपक्षीय समझौतों और नियमों के प्रावधानों के अनुसार ग्राउंड कमांडरों की बैठक में निकाला गया। प्रवक्ता ने कहा कि भारत यह दलील स्वीकार नहीं कर सकता कि उसने यथास्थिति को एकतरफा बदलने की कोशिश की, बल्कि इसके विपरीत भारत ने हमेशा इसे बनाए रखने का प्रयास किया।

बाद में मई के मध्य में चीन ने भारत के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में पश्चिमी सेक्टर में भी एलएसी का उल्लंघन करने के प्रयास शुरू कर दिए। चीन की कोशिशों का भारत की ओर से समुचित जवाब दिया गया। उसके बाद दोनों देशों ने राजनयिक और सैन्य माध्यमों से बातचीत के जरिए स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास शुरू किए।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस महीने की 17 तारीख को बातचीत की, जिसमें भारतीय विदेश मंत्री ने सीमा पर हुई घटनाओं और 15 जून की हिंसक झड़प का कड़े शब्दों में विरोध किया। डॉ. जयशंकर ने चीन के बेबुनियाद के आरोपों को नामंजूर कर दिया। प्रवक्ता ने कहा कि अब दोनों देश एक दूसरे के नियमित सम्पर्क में हैं और सैन्य और राजनयिक स्तर पर बैठकों के जरिए विचार विमर्श कर रहे हैं।

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